महामृत्युंजय मंत्र जप करते समय रखें यह सावधानी
14 जुलाई से सावन के पवित्र महीने का शुभारंभ हो चुका है. हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत पवित्र माना जाता है.

14 जुलाई से सावन के पवित्र महीने का शुभारंभ हो चुका है. हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत पवित्र माना जाता है. पूरे सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना और मंत्र जाप का विशेष महत्व है. इन मंत्रों में से एक है महामृत्युंजय मंत्र. ऐसा माना जाता है कि महामृत्युंजय मंत्र जपने से अकाल मृत्यु टल जाती है. साथ ही भक्तों को आरोग्य का वरदान भी प्राप्त होता है.
ऐसा माना जाता है कि यदि इस मंत्र का जाप पूरे विधि-विधान के साथ किया जाए तो बड़े से बड़ा संकट टल जाता है. ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से जानिए महामृत्युंजय मंत्र को जपने की विधि
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
जप करते समय यह रखें सावधानी
-धर्म शास्त्रों में ऐसा बताया गया है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप धरती पर बैठकर नहीं करना चाहिए. इस मंत्र को हमेशा किसी ऊंचे आसन या कुश का आसान बिछाकर उसके ऊपर बैठकर ही करना चाहिए. इसके अलावा इस मंत्र के जप की एक जगह निर्धारित करें और प्रतिदिन इसी जगह पर बैठकर मंत्र का उच्चारण करें.
-महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपका मुंह हमेशा पूर्व दिशा की ओर ही हो. मंत्र का जाप करते समय अपने ध्यान को भटकने ना दें और एकाग्र रहें. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जप कितने दिन भी आप करें उतने दिन मांस-मदिरा से दूर रहें.
-महामृत्युंजय मंत्र का जप करते समय जातकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इस मंत्र का उच्चारण ठीक ढंग से किया जाए. इसके अलावा एक निश्चित संख्या निर्धारित करके ही इस मंत्र के जाप का प्रण लें. यदि आप चाहें तो इस मंत्र के जप की संख्या को बढ़ा सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि इस मंत्र के जप की संख्या को कम ना करें.
-महामृत्युंजय मंत्र का जप करते समय धूप दीप आदि नियमित रूप से जलते रहना चाहिए.
-इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष माला से ही करना चाहिए.
-इसके अलावा इस मंत्र का जाप उस स्थान पर करें जहां भगवान शिव की मूर्ति या महामृत्युंजय मंत्र रखा हो.
-महामृत्युंजय मंत्र का जप करते वक्त शिवलिंग का दूध मिले जल से अभिषेक भी करते रहना चाहिए.