सर्वपितृ अमावस्या पर न चूकें ये मौका, पितरों के लिए करें 5 खास दान
सर्वपितृ अमावस्या 2026
सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण से पितृ पक्ष में न हो पाया हो।
मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धा के साथ दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को उनका आशीर्वाद मिलता है। पितृ दोष से जुड़े धार्मिक उपायों में भी इस दिन किए गए दान का विशेष महत्व बताया गया है।
इस दिन अन्न दान को सबसे प्रमुख माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को चावल, आटा, दाल या तैयार भोजन दिया जा सकता है। धार्मिक परंपरा में अन्न दान को पूर्वजों की तृप्ति से जोड़ा गया है।
दूसरा महत्वपूर्ण दान काले तिल का है। तर्पण और श्राद्ध कर्म में भी तिल का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि काले तिल का दान करने से पितरों की शांति के लिए किए गए धार्मिक कर्म पूर्ण होते हैं।
तीसरा दान वस्त्र का किया जा सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति को साफ और उपयोगी कपड़े देना शुभ माना जाता है। इसके अलावा धोती, गमछा या अन्य वस्त्र भी श्रद्धानुसार दान किए जा सकते हैं।
चौथे उपाय के रूप में गुड़ और घी का दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे सुख-समृद्धि और परिवार में सकारात्मकता से जोड़ा जाता है।
पांचवां महत्वपूर्ण दान जूते-चप्पल या छाता माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को दैनिक उपयोग की ये वस्तुएं देने को पुण्यकारी माना गया है।
दान करते समय दिखावे की बजाय श्रद्धा और जरूरतमंद की आवश्यकता को प्राथमिकता देना चाहिए। सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और दान के साथ पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करना ही इस दिन का मुख्य उद्देश्य माना जाता है।