हर कोई अपने जीवन में सुख शांति और धन की इच्छा रखता है इसके लिए लोग दिनों रात मेहनत और प्रयास भी करते है। लेकिन फिर भी अगर उन्हें इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है या फिर जीवन में एक के बाद एक परेशानियां आती रहती है तो ऐसे में व्यक्ति निराश और परेशान हो जाता हैं।
अगर आप भी जीवन की समस्याओं से उब चुके है और इनसे मुक्ति का उपाय खोज रहे हैं तो ऐसे में आप शनिवार के दिन भगवान शनिदेव के मंदिर जाकर प्रभु की विधिवत पूजा करें और 11 बार श्री शनि स्तोत्र का संपूर्ण पाठ करें। अंत में अपनी प्रार्थना भगवान से कहकर गरीबों को धन, अन्न व वस्त्रों आदि का जरूर करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं संपूर्ण श्री शनि स्तोत्र पाठ।
श्री शनि स्तोत्र—
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च ।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ॥
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ॥
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते ॥
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने ॥
नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते ।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च ॥
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते ।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते ॥
तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च ।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ॥
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे ।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥
देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा: ।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत: ॥
प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत ।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल: ॥