Navratri पर घटस्थापना में न करें इन नियमों की अनदेखी, वारना खंडित हो जायेगा व्रत
Navratri ज्योतिष न्यूज़ : सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व भी होता है लेकिन नवरात्रि को बेहद ही खास माना जाता है जो कि साल में चार बार पड़ती है जिसमें दो गुप्त नवरात्रि होती है और दो अन्य नवरात्रि होती है जिसमें शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि आती है।
पंचांग के अनुसार नवरात्रि व्रत माता रानी की पूजा अर्चना को समर्पित होता है जो कि पूरे नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा की भक्ति और शक्ति की उपासना में लीन रहते हैं मान्यता है कि ऐसा करने से देवी कृपा बरसती है और कष्ट दूर हो जाते हैं।
इस साल चैत्र नवरात्रि का आरंभ 30 मार्च से हो रहा है और समापन 6 अप्रैल को राम नवमी के साथ हो जाएगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विधान है ऐसे में हम आपको कलश स्थापना से जुड़ी जरूरी जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।
कलश स्थापना से जुड़ी जानकारी—
आपको बता दें कि कलश स्थापना हमेशा ही सुबह या अभिजीत मुहूर्त में ही करना चाहिए। दोपहर बाद या शाम राम में कलश स्थापना करना अच्छा नहीं होता है। इसे अशुभ माना गया है। कलश में गंदी मिट्टी और गंदे पानी का प्रयोग भूलकर भी न करें। कलश स्थापना करने के बाद कलश को नौ दिनों तक हिलाएं नहीं। कलश को हमेशा ही सही दिशा में स्थान को पवित्र करके ही रखना चाहिए। गलती से भी गलत दिशा या अपवित्र जगह पर न रखें।
ऐसा करना अच्छा नहीं होता है। मिट्टी का कलश खंडित या टूटा नहीं होना चाहिए। कलश में रखने वाला जल और मिट्टी अशुद्ध नहीं होनी चाहिए। इसे शौचालय या बाथरूम के आसपास नहीं स्थापित करना चाहिए। कलश को अपवित्र हाथों से छूने की गलती न करें। पवित्रता का भी पूरा ध्यान रखें। कलश स्थापना के बाद घर को सूना यानी खाली नहीं छोड़ना चाहिए। अंखड ज्योत नौ दिनों तक जलती रहे। इसके लिए पर्याप्त तेल घी जरूर रखें।