धर्म : मां दुर्गा की आरती: हिंदू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति, साहस और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, माता के मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में कलश स्थापना करके देवी की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा के बाद उनकी आरती करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है। इस दौरान 'जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी' आरती का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।मां दुर्गा की आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भक्तों की श्रद्धा और विश्वास की अभिव्यक्ति भी है। आरती के समय दीपक जलाकर माता के सामने प्रार्थना की जाती है। घंटी, शंख और भक्ति गीतों की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
मां दुर्गा की आरती का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम मां दुर्गा की आरती करने की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।मां दुर्गा को जगत जननी और आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। देवी के विभिन्न स्वरूपों में शक्ति, ज्ञान, समृद्धि और करुणा का भाव समाहित माना जाता है। आरती के माध्यम से भक्त माता के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और परिवार की सुख-शांति एवं कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
मां दुर्गा की आरती कब और कैसे करें?
मां दुर्गा की आरती सुबह या शाम की पूजा के बाद की जा सकती है। इसके लिए पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और माता के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद फूल, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।आरती करते समय दीपक को सावधानीपूर्वक माता के सामने घुमाएं और श्रद्धापूर्वक आरती गाएं। परिवार के सभी सदस्य इसमें शामिल हो सकते हैं। पूजा पूरी होने पर माता को प्रणाम करें और प्रसाद वितरित करें।नवरात्रि के अलावा शुक्रवार, मंगलवार और अन्य देवी पूजा के अवसरों पर भी मां दुर्गा की आरती की जाती है।
मां दुर्गा की संपूर्ण आरती – जय अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी॥मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ जय अम्बे गौरी॥कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ जय अम्बे गौरीकेहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ जय अम्बे गौरी॥कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥ जय अम्बे गौरी॥शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ जय अम्बे गौरी॥चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ जय अम्बे गौरी॥ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय अम्बे गौरी॥चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ जय अम्बे गौरी॥तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ जय अम्बे गौरी॥भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ जय अम्बे गौरी॥कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ जय अम्बे गौरी॥श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥
यह पारंपरिक आरती है। विभिन्न क्षेत्रों में इसके कुछ शब्दों और पदों में अंतर मिलता है।
माँ दुर्गा आरती

नवरात्रि में दुर्गा आरती करने का महत्व
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। भक्त माता को फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित आरती करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और भक्तों को मानसिक शांति का अनुभव होता है। आरती के माध्यम से माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनकी शक्तियों और महिषासुर जैसे असुरों पर उनकी विजय का स्मरण किया जाता है।
मां दुर्गा की आरती करते समय ध्यान रखें ये बातें
माता की आरती करते समय पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और पूजा में श्रद्धा तथा एकाग्रता बनाए रखें। आरती पूरी होने पर माता से परिवार की सुख-समृद्धि और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।नवरात्रि में भक्त अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और देवी मंत्रों का पाठ भी करते हैं। यह सभी धार्मिक आस्था और भक्ति से जुड़ी परंपराएं हैं।
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