Devuthani Ekadashi 2025: भगवान विष्णु को योगनिद्रा से जगाने की विधि, जानें तारीख और पूजा का सही तरीका

Update: 2025-10-12 15:43 GMT
Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म: हिंदू पंचांग के अनुसार देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, का विशेष धार्मिक महत्व है। यह तिथि भगवान विष्णु के चार महीने की योगनिद्रा से जागने की प्रतीक मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु को जगाकर शुभ कार्यों की शुरुआत करते हैं, क्योंकि चातुर्मास की समाप्ति के बाद यह दिन शुभ कार्यों जैसे विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश के लिए अत्यंत पावन माना जाता है।
कब है देवउठनी एकादशी 2025? (Devuthani Ekadashi 2025 Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है।
✅ तारीख: रविवार, 2 नवंबर 2025
✅ एकादशी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर 2025, रात्रि 10:45 बजे
✅ एकादशी तिथि समाप्त: 2 नवंबर 2025, रात 09:20 बजे
✅ पारणा का समय: 3 नवंबर 2025 को प्रात: 06:25 से 08:45 बजे तक
क्या है देवउठनी एकादशी का महत्व?
पुराणों के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस दौरान देवकार्य (शुभ कार्य) वर्जित रहते हैं, जिसे चातुर्मास कहते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन से पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ तुलसी विवाह का आयोजन भी कई स्थानों पर किया जाता है, जो प्रतीकात्मक रूप से भगवान विष्णु और माता तुलसी के विवाह को दर्शाता है।
भगवान विष्णु को कैसे जगाएं? – पूजन विधि
इस दिन भक्त विशेष रीति से भगवान विष्णु को जगाते हैं। नीचे जानिए पूजा विधि:
1. प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें
सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
“ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए व्रत का संकल्प लें।
2. भगवान विष्णु की स्थापना करें
घर में किसी पवित्र स्थान पर शालग्राम या भगवान विष्णु की मूर्ति रखें।
पूजा स्थल को स्वच्छ करके उसे फूलों, दीपों और रंगोली से सजाएं।
3. तुलसी दल और पंचामृत से पूजा करें
भगवान को तुलसी पत्र, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से अभिषेक करें।
4. जागरण मंत्रों का जाप करें
इस दिन भगवान विष्णु को शंख बजाकर, घंटी और आरती से जगाया जाता है।
“उठो देवा, बैठो देवा, अंगुरी फैलावो देवा” जैसे पारंपरिक मंत्र बोले जाते हैं।
5. तुलसी विवाह करें (अगर संभव हो)
घर में तुलसी और शालग्राम का विवाह प्रतीकात्मक रूप से करें।
विवाह के दौरान विवाह गीत गाएं और मंगल कलश की स्थापना करें।
देवउठनी एकादशी व्रत के नियम
एकादशी व्रत में अन्न, चावल, मांस, लहसुन-प्याज, और तामसिक भोजन वर्जित होता है।
व्रती को दिनभर उपवास रखना चाहिए या फलाहार करना चाहिए।
इस दिन केवल सात्विक भोजन करना चाहिए।
शाम को भगवान विष्णु की आरती करें और कथा सुनें।
देवउठनी एकादशी की कथा (संक्षेप में)
एक समय लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु से पूछा कि आप साल भर जगते हैं और देवताओं के कार्य करते हैं, लेकिन विश्राम नहीं करते। तब भगवान विष्णु ने कहा कि वे चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाएंगे और इस अवधि में कोई शुभ कार्य नहीं होंगे। जब वे कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागेंगे, तब पुनः विवाह आदि शुभ कार्यों की शुरुआत होगी। उसी दिन से यह तिथि देवउठनी एकादशी कहलाने लगी। देवउठनी एकादशी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु को जगाकर जीवन में नई ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मकता का संचार किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पुण्य, व्रत और भक्ति से भरपूर होता है। अगर आप भी अपने जीवन में शुभता और सफलता चाहते हैं, तो इस दिन पूजा-व्रत अवश्य करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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