26 मई को इस साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह उपछाया चंद्रग्रहण होगा जो वृश्चिक राशि में लगेगा। ग्रहण काल की अवधि को धर्म, ज्योतिष और धार्मिक नजरिए से अशुभ समय माना जाता है। ग्रहण 26 मई को दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से प्रारंभ होगा जो शाम के 7 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगा। ऐसे में यह चंद्रग्रहण कुल मिलाकर 5 घंटे और 2 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस बार चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं लगेगा। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाएं इन बातों का जरूर ध्यान रखें-

ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जैसे चाकू, कैंची, सूई आदि। शास्त्रों में यह भी कहा जाता है कि न सिर्फ गर्भवती महिलाएं बल्कि उनके पति भी इस समय इन चीजों का इस्तेमाल करने से बचें। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उसके शिशु के अंगों को हानि पहुंच सकती है।
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गर्भवती महिला अगर ग्रहण देख लेती है तो उसका सीधा असर उसके होने वाले बच्चे की शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है। जन्म के बाद बच्चे के शरीर पर कोई न कोई दाग जरूर पड़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बना हुआ खाना नहीं खाना चाहिए। कहा जाता है कि इस समय में पड़ने वाली हानिकारक किरणें खाने को दूषित कर देती हैं।ऐसे में अगर घर पर खाना बना हो तो उसमें तुरंत तुलसी के पत्ते डाल दें। ग्रहण खत्म होने के बाद उन्हें निकाल दें। ऐसा करने से ग्रहण के बाद भी खाना शुद्ध रहता है।
मान्यता है कि ग्रहण खत्म होने के बाद गर्भवती महिला को स्नान कर लेना चाहिए नहीं तो शिशु को त्वचा संबधी रोग लग सकते हैं। ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए गर्भवती महिला को तुलसी पत्ती जीभ पर रखकर हनुमान चालीसा और दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए।


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