अनंत चतुर्दशी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के साथ ही गणेश उत्सव के समापन के लिए भी जाना जाता है। इस बार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। दस दिनों तक घरों और पंडालों में विराजमान भगवान गणेश को इस दिन श्रद्धा और उल्लास के साथ विदाई दी जाती है। भक्त बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हुए उनका विसर्जन करते हैं।
गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। जिन श्रद्धालुओं ने गणपति की प्रतिमा दस दिनों के लिए स्थापित की है, वे अनंत चतुर्दशी पर विधि-विधान से अंतिम पूजा और आरती करने के बाद प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। विसर्जन से पहले भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, फल, फूल, दूर्वा और अन्य प्रिय वस्तुएं अर्पित की जाती हैं।
विसर्जन से पहले ऐसे करें अंतिम पूजा
सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। गणपति के सामने दीपक और धूप जलाएं। भगवान गणेश को सिंदूर, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद मोदक या घर में तैयार मिठाई का भोग लगाएं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की आरती करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें।
प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले श्रद्धापूर्वक गणपति से विदाई लेने की परंपरा है। इस दौरान भक्त सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इसके बाद गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ जैसे जयकारों के साथ प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।
विसर्जन की तैयारी में इन बातों का रखें ध्यान
विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों और कृत्रिम कुंडों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को गहरे पानी से दूर रखें और नदी या तालाब में उतरते समय जल्दबाजी न करें। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन प्राथमिकता से करना चाहिए। घर में छोटी प्रतिमा स्थापित की गई हो तो उसे साफ पानी से भरे बड़े पात्र में विसर्जित किया जा सकता है। बाद में इस पानी और मिट्टी का इस्तेमाल पौधों में किया जा सकता है।
अनंत चतुर्दशी केवल गणपति विसर्जन तक सीमित नहीं है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने की भी धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस तरह अनंत चतुर्दशी श्रद्धा, भक्ति और बप्पा को भावपूर्ण विदाई देने का विशेष अवसर बन जाती है।
Tags: