ज्योतिष न्यूज़: आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के दौर में जहां नई पीढ़ी तेजी से बदलती जीवनशैली को अपना रही है, वहीं धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों का विश्वास भी लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है. दरअसल मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और पूजा-अनुष्ठानों में कलाई पर कलावा बंधवाने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है.लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा केवल एक धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर की कृपा का प्रतीक माना जाता है.
धार्मिक ग्रंथों में कलावे को रक्षा सूत्र कहा गया है
हाल के वर्षों में देखा गया है कि युवा वर्ग भी पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है. बता दें कि मंदिरों में होने वाले हवन, कथा और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालु, कलावा धारण कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि कलावा बांधने से व्यक्ति के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है, जो उसे नकारात्मक प्रभावों और बाधाओं से बचाने का कार्य करता है.वही धार्मिक ग्रंथों में कलावे को रक्षा सूत्र कहा गया है. मान्यता है कि इसके धागों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ माता लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती का वास होता है. यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत कलावा बांधकर की जाती है.