Religion धर्म : ज्येष्ठ महीने में आने वाली निर्जला एकादशी का इंतजार देशभर के श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं। इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और इसे सभी एकादशियों में विशेष महत्व प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें बिना जल ग्रहण किए पूरे दिन उपवास रखा जाता है। इसी कारण इसे अत्यंत पुण्यदायी भी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत का फल सभी एकादशियों के बराबर माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों और विद्वानों के अनुसार एकादशी केवल खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन व्यक्ति के आचरण और व्यवहार का भी विशेष महत्व होता है। व्रत रखने वाले लोगों को संयम, शांति और सात्विकता का पालन करने की सलाह दी जाती है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है और श्रद्धालु दिनभर भजन-कीर्तन और ध्यान में लीन रहते हैं। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करना भी शुभ माना जाता है।
हालांकि निर्जला एकादशी के दिन कुछ कार्यों से बचने की विशेष सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन क्रोध, झूठ, नकारात्मक विचार और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। साथ ही तामसिक भोजन और नशे से भी दूरी बनाए रखने की बात कही जाती है।
इसके अलावा इस दिन किसी भी प्रकार के विवाद या अनावश्यक बहस से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है। व्रत के दौरान मन और विचारों की शुद्धता को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्जला एकादशी का उद्देश्य केवल शारीरिक उपवास नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता भी है। यह दिन आत्मसंयम और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
इस तरह 25 जून को आने वाली निर्जला एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह व्यक्ति को संयम, अनुशासन और सेवा भावना की ओर भी प्रेरित करती है।