Religion धर्म : निर्जला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे कठोर उपवासों में से एक कहा जाता है। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि में विधि-विधान से करने के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। लेकिन व्रत खोलने के बाद क्या तुरंत चाय या कॉफी पीना उचित है, इसको लेकर लोगों के मन में अक्सर भ्रम रहता है।
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब पारण सही समय और सही विधि से किया जाए। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करना, उन्हें भोग अर्पित करना और तुलसी दल चढ़ाना आवश्यक माना जाता है। इसके बाद ही व्रत खोलना शुभ होता है।
परंपरा के अनुसार, व्रत खोलने की शुरुआत हमेशा हल्के और सात्विक भोजन से करनी चाहिए। इसमें पानी, फल, दूध, शरबत, केला या खीर जैसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। माना जाता है कि लंबे उपवास के बाद शरीर को धीरे-धीरे सामान्य भोजन की ओर लाना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र पर अचानक दबाव न पड़े।
जहां तक चाय या कॉफी का सवाल है, शास्त्रों में इसका कोई स्पष्ट निषेध नहीं मिलता। यानी इसे पूरी तरह वर्जित नहीं कहा गया है, लेकिन धार्मिक विद्वानों और परंपराओं के अनुसार, व्रत खोलते ही चाय या कॉफी का सेवन करने की बजाय पहले सात्विक भोजन करना अधिक उचित माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्रत का उद्देश्य केवल उपवास नहीं बल्कि मन और शरीर दोनों में संयम बनाए रखना होता है। इसलिए पारण के समय भी सादगी और संतुलन का पालन करने की सलाह दी जाती है।
कई वैष्णव परंपराओं में भी यह माना जाता है कि व्रत खोलने के तुरंत बाद भारी या उत्तेजक पेय पदार्थों से बचना चाहिए और पहले शरीर को हल्का आहार देना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या शुरू की जा सकती है।
कुल मिलाकर, निर्जला एकादशी व्रत के पारण के बाद चाय या कॉफी पीना पूरी तरह निषिद्ध नहीं है, लेकिन परंपरा और स्वास्थ्य दोनों के अनुसार पहले सात्विक भोजन करना अधिक सही और लाभकारी माना जाता है।