धर्म डेस्क : नवरात्रि के अंतिम दिनों में श्रद्धालुओं के मन में कलश विसर्जन की तारीख को लेकर सवाल उठते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कई परिवार महानवमी पर हवन और कन्या पूजन के बाद कलश उठाते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर विजयादशमी को विसर्जन किया जाता है। इसलिए परिवार की चली आ रही पूजा पद्धति और स्थापना के समय लिए गए संकल्प को ध्यान में रखना चाहिए। अष्टमी पर कन्या पूजन करने का अर्थ यह नहीं कि उसी दिन कलश विसर्जन भी अनिवार्य है। 

इस वर्ष नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे से 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। नवमी पर समापन करने वाले श्रद्धालु इसी तिथि में पूजा, हवन और कन्या पूजन पूरा कर सकते हैं। दशमी की परंपरा वाले परिवार दशमी तिथि शुरू होने के बाद विसर्जन करें। सटीक मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें; किसी दूसरे शहर का समय अपने यहां लागू न मानें। 
विसर्जन से पहले मां दुर्गा को पुष्प और भोग अर्पित करें। आरती करके पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और प्रसाद बांटें। इसके बाद नारियल तथा अन्य सामग्री श्रद्धापूर्वक हटाएं। खाने योग्य नारियल को प्रसाद के रूप में बांटा जा सकता है। कलश का जल घर में छिड़कने या पौधों में डालने की परंपरा है। 
कलश में रखे सिक्के और सुपारी को अगली पूजा के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। धातु का कलश साफ करके दोबारा उपयोग करें। पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक समेटें और जलस्रोत में प्लास्टिक या सजावटी सामान न डालें।

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