मुंबई में छोटी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए बने कृत्रिम तालाब
BMC ने बदले गणेश विसर्जन के नियम
मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ा फैसला लिया है। BMC ने कहा है कि मुंबई में 6 फीट से छोटी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया जाएगा।
नगर निकाय का यह कदम समुद्र, झीलों और प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रशासन का कहना है कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद लिया फैसला
गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर पर्यावरण से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे। इसके बाद BMC ने विसर्जन व्यवस्था में बदलाव करते हुए छोटे आकार की मूर्तियों के लिए कृत्रिम तालाबों का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
मुंबई में बनाए जाएंगे कृत्रिम तालाब
BMC हर साल गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई स्थानों पर कृत्रिम तालाब तैयार करता है। इन तालाबों में विसर्जन करने से समुद्र और अन्य जलस्रोतों पर दबाव कम होता है। नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि वे पर्यावरण अनुकूल तरीके से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
गणेश प्रतिमाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, रंग और सजावट की वजह से जल प्रदूषण की चिंता रहती है। खासकर प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों को लेकर पर्यावरणविद लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन मिट्टी से बनी प्रतिमाओं और कृत्रिम विसर्जन स्थलों को बढ़ावा दे रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा का भी रखा जाएगा ध्यान
BMC ने कहा है कि विसर्जन स्थलों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। गणेशोत्सव मुंबई का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पर्व माना जाता है, जिसमें लाखों लोग हिस्सा लेते हैं।
परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन
प्रशासन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए पर्यावरण की रक्षा करना है। कृत्रिम तालाबों में विसर्जन की व्यवस्था इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।BMC ने लोगों से अपील की है कि वे गणपति बप्पा के उत्सव को श्रद्धा के साथ मनाएं और प्रकृति की सुरक्षा में भी सहयोग करें।