सावन के पवित्र महीने का अंतिम सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन आयुष्मान योग का निर्माण हो रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से शुभ और फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु सुबह से ही शिव मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं और पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। अंतिम सोमवार होने के कारण देशभर के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री से भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार सावन के अंतिम सोमवार पर आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। आयुष्मान योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस योग में की गई पूजा, साधना और धार्मिक कार्यों से सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल मिलने की मान्यता है।
पूरे दिन रहेगा जलाभिषेक का शुभ अवसर
सावन के अंतिम सोमवार को शिव भक्तों के लिए जलाभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव को श्रद्धा से जल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दिनभर मंदिरों में पहुंचकर पूजा कर सकते हैं।
शिव पूजा में विशेष रूप से पंचामृत अभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का महत्व बताया गया है। कई मंदिरों में इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।
शाम को होगा भगवान शिव का भव्य श्रृंगार
सावन के अंतिम सोमवार की शाम को भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिरों में फूलों, बेलपत्र और आकर्षक सजावट के साथ भोलेनाथ का अलौकिक रूप भक्तों के दर्शन के लिए तैयार किया जाएगा। कई स्थानों पर शाम की आरती और भजन-कीर्तन का भी आयोजन होगा।
श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन सोमवार पर भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी वजह से अंतिम सोमवार को शिव भक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सावन के अंतिम सोमवार को देश के प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से शिवालय गूंज उठे हैं। प्रशासन की ओर से भी कई मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं। भक्त बेलपत्र, फूल, फल और जल लेकर मंदिर पहुंच रहे हैं। कई कांवड़ यात्री भी सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं।
सावन का अंतिम सोमवार धार्मिक आस्था और भक्ति का विशेष पर्व माना जाता है। आयुष्मान योग के शुभ संयोग के कारण इस दिन पूजा-पाठ और जलाभिषेक का महत्व और बढ़ गया है। भक्त पूरे दिन भगवान शिव की आराधना कर शाम को विशेष श्रृंगार और आरती में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
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