रायपुर। संत आशाराम बापू की पावन प्रेरणा से साधक परिवार रायपुर छ.ग.के अथक प्रयास से दिवाली के निमित करीब 50 गरीब परिवारों में दिया,बाती,तेल,माचिस,दाल,मटर,देशी चना,काबुली चना, खजूर,पोहा,आटा,बाल्टी,वस्त्र,मिठाई,नव वर्ष का कैलेंडर,ऋषि प्रसाद पत्रिका व नगद राशि का वितरण किया गया। अपने दुख में रोने वाले मुस्कुराना सिख ले,दूसरे के दुख दर्द में आंसू बहाना सिख ले,जो खिलाने में मजा है वो आप खाने में नही, जिंदगी है 4 दिन की तू किसी के काम आना सिख ले।
सर्व प्रथम प्रार्थना व मंगल आरती करके भगवन्नाम जप करवाकर फिर दिवाली की महिमा व बापूजी का उदेश्य लाखो लोगो का दारू मास,नशा छुडवाये,धर्मातरण हुये हिन्दुवो को पुनः आपने धर्म में वापसी करवाए,आज इन्ही सब बातो क़े चलाते उन्हें कारावास मिला है!"नर सेवा ही नारायण सेवा है" दूसरों का हित करने से आपके भीतर सिंह का बल आ जाता है।
पांच पर्व की सुरभि माला दीपावली का महापर्व हमें यही संदेश देता है कि पर्व और उत्सव आध्यात्मिक विकास के लिए बहुत जरूरी है. सामाजिक रीति रिवाज तो अपने को ढांचे में डालते हैं लेकिन पर्व उत्सव व्यक्ति को मुक्त, मधुरता, प्रसन्नता देते है और ईश्वर प्राप्त महापुरुषों के साथ आत्मीयता का राजमार्ग बता देते हैं. आज भी सनातन संस्कृति की यह धरोहर पूरे विश्व को प्रकाशित करने में सक्षम एवं समर्थ है.धनतेरस ,नरक चतुर्दशी, दिवाली बाली प्रतिपदा और भाई दूज इन पांच पर्वों का झुमका है दिवाली पर्व.पांच इंद्रियों में, पांच विकारों में भटकने वाला जीव पंचामृत का उपयोग करके पांच विकारों को नियंत्रित करके पांच कर्मेंद्रियां ,पांच ज्ञानेंद्रिय एवं पांच प्राणों का संयम करके महापुरुष बन सकता है. यही संतों के द्वारा दिया गया मानव कल्याण हेतु दीपावली का पावन संदेश है।
" प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजिएगा"
यह आयोजन खरोरा शिकारी बस्ती नये थाने क़े आगे ग्राम खरोरा रायपुर किये व वृद्धा आश्रम बढ़ते कदम लाभण्डी व लायन्स कलब श्याम नगर मे किया,जिसमे मुख्य रूप से आश्रम क़े वरिष्ठ प्रफुल्ल भाई यशवंत वर्मा, कुलेश्वर भाई, जागेश्वर भाई,वीरेंद्र भाई व महिला मण्डल की बहन व बाल सस्कार के सेवाधारी बड़ी संख्या में उपस्थिति हुये व आयोजन संपन्न हुआ।