उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी कार मामले में मुंबई पुलिस ही नहीं, महाराष्ट्र सरकार भी सवालों के घेरे में

आसमान सिर पर उठाने वाले ये राजनीतिक दल इस मामले में चुप्पी साधकर फजीहत से बच नहीं सकते।

Update: 2021-03-18 05:01 GMT

मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का तबादला यही बता रहा है कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी कार खड़ी करने के मामले की आंच उन तक भी पहुंच चुकी थी। वास्तव में वह तभी सवालों से घिर गए थे, जब सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया था। यह गिरफ्तारी विस्फोटक लदी कार के मालिक की हत्या के सिलसिले में की गई। अब तो यह संदेह भी गहरा गया है कि कार में विस्फोटक भरकर उसे मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ी करने का काम कहीं सचिन वझे ने ही तो नहीं किया? सच जो भी हो, परमबीर सिंह के स्थानांतरण मात्र से बात बनने वाली नहीं है, क्योंकि यह प्रश्न अनुत्तरित है कि हिरासत में मौत के मामले में निलंबित और फिर नौकरी छोड़कर शिवसेना की सदस्यता ग्रहण कर चुके सचिन वझे को महामारी की आड़ में बहाल करने का काम क्यों और किसके इशारे पर किया गया? इससे भी गंभीर प्रश्न यह है कि मुंबई के सारे बड़े मामले उसके पास ही क्यों पहुंच रहे थे? आखिर यह मनमानी किसके इशारे पर हो रही थी? क्या पुलिस आयुक्त के या फिर उनके ऊपर भी कोई था? इन सारे सवालों के जवाब मुंबई पुलिस ही नहीं, महाराष्ट्र सरकार को भी देने होंगे, क्योंकि उसकी ही अतिरिक्त कृपा से सचिन वझे की पुलिस में बहाली हो सकी।

यह विचित्र है कि जब एक बेहद गंभीर मामले में महाराष्ट्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि पुलिस की कार्रवाई नीर-क्षीर ढंग से हो, तब बहुत ही भद्दे ढंग से लीपापोती की गई। इससे भी बुरी बात यह है कि शिवसेना नेता और यहां तक कि खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बदनाम सचिन वझे की पैरवी कर रहे हैं। क्या महाराष्ट्र में इस तरह कायम होगा कानून का शासन? देश ही नहीं, दुनिया के नामी कारोबारी मुकेश अंबानी को आतंकित करने के मामले में शिवसेना के चहेते पुलिस इंस्पेक्टर की संदिग्ध भूमिका मुंबई पुलिस के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार को शर्मसार करने वाली है, लेकिन सरकार में बैठे लोग र्शंिमदा होने के बजाय यह राग अलापने में लगे हैं कि मुंबई पुलिस को नीचा दिखाने की कोशिश हो रही है। उसकी छीछालेदर तो उसके अपने कर्मों से हो रही है। जरूरी केवल यह नहीं कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस संगीन मामले की जांच तत्परता से करे, बल्कि यह भी है कि महाराष्ट्र सरकार में साझीदार कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अपनी जवाबदेही से मुंह न मोड़ें। अन्य राज्यों के छोटे-छोटे मसलों पर आसमान सिर पर उठाने वाले ये राजनीतिक दल इस मामले में चुप्पी साधकर फजीहत से बच नहीं सकते।


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