नई दिल्ली: अमेरिकी सैन्य बलों के अधिकारी व जवान हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ मंदिर पहुंचे और यहां दर्शन किए। इसके साथ ही अमेरिकी जवान बीकानेर स्थित जूनागढ़ के किले में भी गए। दरअसल भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' आयोजित किया गया है।
युद्धाभ्यास के बीच अमेरिकी सैनिकों ने प्रशिक्षण के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को भी करीब से जाना। भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों ने राजस्थान के बीकानेर स्थित ऐतिहासिक जूनागढ़ किले का भ्रमण किया। वहीं उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन भी किया। बीकानेर का जूनागढ़ किला सैनिकों के लिए राजस्थान के शाही इतिहास, भव्य स्थापत्य और सैन्य परंपराओं को समझने का अवसर बना। किले की ऐतिहासिक विरासत ने उन्हें भारत के उस दौर से परिचित कराया, जब स्थापत्य कला के साथ सैन्य कौशल और राजसी परंपराएं भी भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।
वहीं, हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ मंदिर की यात्रा ने दोनों देशों के सैनिकों को भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर दिया। प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित यह मंदिर भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं की एक महत्वपूर्ण पहचान है। युद्ध अभ्यास 2026 में दोनों सेनाओं के बीच सैन्य प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान के साथ इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने संबंधों को एक अलग आयाम दिया।
प्रशिक्षण क्षेत्र से बाहर हुए इन संवादों और यात्राओं से दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला। इन सांस्कृतिक अनुभवों ने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के बीच सौहार्द, आपसी समझ और सम्मान को और मजबूत किया। इस तरह युद्ध अभ्यास केवल सैन्य कौशल साझा करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों सेनाओं के जवानों को भारत की विविध और समृद्ध सभ्यतागत विरासत से जुड़ने का अवसर भी मिला।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे थे। इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में रही। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल भी किया। भारत और अमेरिका की सेनाओं ने अपनी तोपखाना क्षमता का प्रदर्शन भी किया।
भारत में हुए युद्धाभ्यास में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर से फायरिंग की गई। एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने सीधे नजर आ रहे लक्ष्यों को डायरेक्ट फायरिंग पद्धति से निशाना बनाया। राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज एम777 की तोप टुकड़ियों ने बेहद सटीक निशाना साधा। सभी निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इस दौरान जवानों ने अपनी पेशेवर दक्षता, सटीकता और युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता का प्रदर्शन किया।
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