युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए पेंटागन का नया कदम, सैनिकों की होगी टेस्टोस्टेरोन जांच
वाशिंगटन: अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने ट्रंप प्रशासन की व्यापक सैन्य तैयारी योजना के तहत 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्यकर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच कराने का आदेश दिया है।
यह कदम सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाने, युद्धक्षेत्र में प्रदर्शन को अधिक प्रभावी बनाने और पेंटागन द्वारा "ऑपरेटर सिंड्रोम" कही जाने वाली स्थिति से निपटने की रणनीति का हिस्सा बताया गया है। दरअसल ऑपरेटर सिंड्रोम से ग्रस्त सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने, लगातार थकान और ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति में गिरावट, नींद से जुड़ी समस्याएं, याददाश्त और एकाग्रता में कमी, तनाव, चिंता या अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण और रिकवरी में अधिक समय लगने जैसे समस्याएं नजर आ सकती हैं। इसी को ध्यान में रखकर पेंटागन ने यह फैसला किया है।
नई पॉलिसी की घोषणा स्थानीय समयानुसार बुधवार को की गई और पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने परफॉर्मेंस को ऑप्टिमाइज करने, ऑपरेटर सिंड्रोम से निपटने और मिशन की तैयारी को मैक्सिमाइज करने के लिए एक बेहतर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल का निर्देश दिया था।
पेंटागन के प्रवक्ता पार्नेल ने कहा, "तत्काल प्रभाव से 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्य कर्मियों की उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मी भी यदि चाहें, तो अपनी पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट के दौरान यह जांच करा सकते हैं।"
पेंटागन ने कहा कि यह पहल ऐसी तत्पर, घातक और युद्ध के मैदान में निर्णायक बढ़त हासिल करने में सक्षम सैन्य शक्ति तैयार करने और बनाए रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो ताकत के जरिए शांति के उद्देश्य को पूरा कर सके।
पार्नेल के अनुसार, बेहतर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल डिपार्टमेंट के वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन-टोटल फोर्स फिटनेस प्रोग्राम को पूरा करता है और फोर्स के स्वास्थ्य, अच्छे प्रदर्शन और लचीलेपन में लगातार निवेश को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रोटोकॉल डिपार्टमेंट को एक पूरी बेसलाइन बनाने और टारगेटेड टेस्टोस्टेरोन थेरेपी देने में मदद करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि यह एक स्वास्थ्य, काबिल और पूरी तरह से असरदार फाइटिंग फोर्स बनाए रखे।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन में कहा गया है कि यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इसके तहत 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सैन्यकर्मियों के लिए पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट (पीएचए) के दौरान टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच अनिवार्य होगी। वहीं, 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मी अपनी इच्छा से यह जांच करा सकेंगे।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि "पूरे सैन्य बल में 'ऑपरेटर सिंड्रोम' के उपचार से मिले अनुभवों को लागू करते हुए लक्षित टेस्टोस्टेरोन थेरेपी सीधे तौर पर सैनिकों की युद्धक क्षमता और तत्परता को बेहतर बनाती है।"
आदेश के अनुसार, कार्मिक एवं तैयारी मामलों के अवर सचिव को 15 अगस्त तक विभागीय नीति में संशोधन कर इस नई अनिवार्य जांच को मौजूदा स्वास्थ्य मूल्यांकन दिशानिर्देशों में शामिल करना होगा।
इसके अलावा सभी सैन्य विभागों और डिफेंस हेल्थ एजेंसी (डीएचए) को भी अपनी अधीनस्थ नीतियों में बदलाव करने, आंतरिक प्रक्रियाओं को नई व्यवस्था के अनुरूप ढालने तथा चिकित्सा कर्मियों और सैन्यकर्मियों को इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य मामलों के सहायक सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि पूरे सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली में टेस्टिंग उपलब्ध हो और क्लिनिकल गाइडेंस जारी करेंगे। इसके साथ ही विभाग के स्वास्थ्य और मानव प्रदर्शन अनुकूलन की कोशिशों को गाइड करने के लिए बाहरी विशेषज्ञों की एक एडवाइजरी काउंसिल बनाएंगे।
यह नया निर्देश हेगसेथ के मई के मेमोरेंडम पर आधारित है, जिसमें पेंटागन की वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन–टोटल फोर्स फिटनेस पहल शुरू की गई थी। उस डॉक्यूमेंट में कहा गया था कि सेना को वॉरफाइटर को एक तैयार क्षमता के तौर पर देखना चाहिए। इसे उसी डिसिप्लिन्ड इवैल्यूएशन, मेंटेनेंस और ऑप्टिमाइजेशन के लिए रखा जाना चाहिए, जिसकी हम हर उस एसेट से मांग करते हैं जो कॉम्बैट पावर को बचाए रखता है।
इसके साथ ही नीति में सैन्य बलों की युद्धक तैयारी को बेहतर बनाने के लिए डेटा एनालिटिक्स, पहनने योग्य तकनीकों और संज्ञानात्मक प्रदर्शन के आकलन का अधिक व्यापक उपयोग करने पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक और मानसिक क्षमता की बेहतर निगरानी करना तथा उनकी समग्र ऑपरेशनल तैयारी को और मजबूत बनाना है।