‘भारतीय चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान जरूरी’; जनरल द्विवेदी ने आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

Update: 2026-06-30 07:01 GMT
नई दिल्ली: भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि “भारतीय चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान आवश्यक हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य के युद्ध के लिए एक मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है।
आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि संकट के समय देश को अपने ही सिस्टम और संसाधनों पर निर्भर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वदेशी प्रणालियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का एक अहम हिस्सा बनती जा रही हैं।
केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भरता’ पहल और सेना के उसके समर्थन पर पूछे गए सवाल के जवाब में जनरल द्विवेदी ने कहा, “आत्मनिर्भरता अब राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य के युद्ध के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। किसी भी संकट की स्थिति में देश को अपने सिस्टम, अपने औद्योगिक आधार और लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को सहने की क्षमता पर भरोसा होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “स्वदेशी प्रणालियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और अब निगरानी, संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सटीक हमले, सूचना प्रबंधन और परिचालन निर्णय लेने जैसी क्षमताओं का केंद्र बनती जा रही हैं। स्वदेशी क्षमता अब केवल सैन्य तैयारी का सहायक हिस्सा नहीं रही, बल्कि यह उसका अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।”
साथ ही, उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और भविष्य में लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, उन्नत हथियार, ड्रोन और एंटी-यूएएस सिस्टम जैसी जरूरतें बढ़ती रहेंगी।
उन्होंने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मजबूत संचार व्यवस्था, एआई-आधारित निर्णय प्रणाली, स्वायत्त प्लेटफॉर्म और युद्धक्षेत्र की बेहतर जानकारी जैसी क्षमताओं की जरूरत और बढ़ेगी। इसलिए यह जरूरी है कि रक्षा उद्योग मौजूदा और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार रहे।”
जनरल द्विवेदी ने कहा, “हमें भारतीय चुनौतियों के लिए भारतीय समाधान चाहिए क्योंकि हमारा भूभाग, खतरे की प्रकृति और परिचालन आवश्यकताएं विशिष्ट हैं। हमारा डीआरडीओ, डीपीएसयू, निजी उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोग तेज परीक्षण, बेहतर सहयोग और शीघ्र तैनाती पर केंद्रित है।”
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया और कहा कि इसने भारतीय सेना की “संयुक्त, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार युद्धक क्षमता” को प्रमाणित किया है। साथ ही, भारत की सुरक्षा व्यवस्था की “सामूहिक ताकत” को भी प्रदर्शित किया है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने सेना के परिवर्तन को एक “एकीकृत संस्थागत प्रक्रिया” और “मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन” के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता को भी और मजबूत किया है।
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