न्यूयॉर्क: भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट आवाजाही की आजादी के सिद्धांत को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। क्षेत्र में मौजूदा हालात के कारण इस स्वतंत्रता पर खतरा बढ़ गया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को भारत-जीसीसी ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की संयुक्त अध्यक्षता की। इस दौरान क्षेत्र के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट आवाजाही की आजादी के सिद्धांत को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में ल‍िखा, "हमने समुद्री आवाजाही की आजादी और नाविकों तथा कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई।" इस बैठक में जीसीसी के महासचिव जासेम अल-बुदैवी, बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ अल-जयानी और कतर के विदेश मामलों के राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल मुरैखी समेत कई प्रतिनिधि शामिल हुए।
जयशंकर ने बताया कि बैठक में भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना 2024-28 के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही भारत और जीसीसी के बीच साझेदारी को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
इस जॉइंट एक्शन प्लान को 2024 में रियाद में हुई पहली भारत-जीसीसी विदेश मंत्रियों की बैठक में अपनाया गया था। इसमें स्वास्थ्य, व्यापार, कृषि, खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा तथा संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। जयशंकर ने खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय को दिए जा रहे सहयोग के लिए जीसीसी देशों के नेतृत्व को धन्यवाद भी दिया।
भारतीय प्रवासियों की सबसे बड़ी आबादी खाड़ी क्षेत्र में रहती है, जहां 90 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं। जयशंकर ने बताया कि बैठक में भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत शुरू होने का भी स्वागत किया गया।
छह देशों वाला जीसीसी फिलहाल भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 178 अरब डॉलर रहा था। मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत फरवरी में दोबारा शुरू हुई थी। मंत्रिस्तरीय बैठक की तैयारी के तहत पिछले महीने रियाद में सऊदी अरब में भारत के राजदूत विपुल और जीसीसी महासचिव अल-बुदैवी के बीच भी बातचीत हुई थी।
जयशंकर ने अपनी पोस्ट में ल‍िखा, "हम व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, नई टेक्नोलॉजी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद करते हैं।"
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