नई दिल्ली: कैसे बिजली से एक अकेले अणु को घुमाकर उसमें बहने वाली विद्युत धारा को 100 गुना तक बढ़ाया जा सकता है, यह महत्वपूर्ण रिसर्च भारत में की गई है। इस खोज से भविष्य में बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने का रास्ता खुल सकता है। ऐसे उपकरणों में अणुओं की गति के जरिए बिजली के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस अंतरराष्ट्रीय शोध में भारत, इजरायल, जर्मनी, डेनमार्क और चीन के वैज्ञानिक शामिल थे।
आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार सिंह और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने अपने प्रयोगों में यह रिसर्च किया है। इस रिसर्च से बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक बनाए जा सकते हैं, हालांकि अभी यह शुरुआती वैज्ञानिक शोध है। वैज्ञानिकों ने पाया कि बिजली अणु को एक निश्चित दिशा में घुमा सकती है। अणु की यह गति इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह को भी तेज कर सकती है। यह महत्वपूर्ण शोध दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित हुआ है। इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल की तकनीक बनने में और अध्ययन की जरूरत होगी।
वैज्ञानिकों ने एक ऐसे अणु का इस्तेमाल किया, जिसकी बनावट घुमावदार पेंच जैसी है। इसका नाम हेलिसीन है। इस अणु को सोने के दो बेहद छोटे इलेक्ट्रोड के बीच लगाया गया। फिर उसके बीच विद्युत विभव दिया गया, जिससे अणु की गति और उसमें बहने वाली विद्युत धारा का अध्ययन किया जा सका। प्रयोग में सामने आया कि बिजली मिलने पर अणु अलग-अलग स्थितियों से गुजरते हुए एक निश्चित चक्र में घूमने लगता है। घूमते समय वह ऐसी स्थितियों में पहुंचता है, जहां से इलेक्ट्रॉनों का गुजरना आसान हो जाता है। नतीजा यह हुआ कि अणु के आर-पार बहने वाली विद्युत धारा लगभग 100 गुना तक बढ़ गई।
आईआईटी के मुताबिक इस खोज की एक और खास बात यह रही कि वैज्ञानिक अणु के घूमने की दिशा को भी नियंत्रित करने में सफल रहे। जिन 122 मामलों में अणु की स्थिति बदलने की दिशा स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकी, उन सभी में एक जैसा चक्र देखा गया। जब वैज्ञानिकों ने बिजली की ध्रुवता बदली, तो अणु की गति का क्रम भी उलट गया। इससे पता चला कि बिजली के जरिए अणु की गति की दिशा बदली जा सकती है। इस प्रयोग के पीछे आर्किमिडीज के पेंच से प्रेरित एक दिलचस्प विचार था। इस तरह के पेंच का इस्तेमाल पानी को नीचे से ऊपर पहुंचाने के लिए किया जाता है।
वैज्ञानिकों ने इसी सिद्धांत से प्रेरणा लेकर यह समझने की कोशिश की कि क्या बिजली और घूमने की गति के बीच भी ऐसा संबंध बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने हेलिसीन नाम के घुमावदार अणु को दो सोने के इलेक्ट्रोड के बीच रखा। प्रयोग के दौरान बिजली के एक निश्चित स्तर से आगे बढ़ने पर विद्युत धारा में अचानक तेज वृद्धि देखी गई। प्रयोगों और सैद्धांतिक गणनाओं से संकेत मिला कि इस स्थिति में अणु अलग-अलग स्थितियों के बीच धीरे-धीरे बदलने के बजाय लगातार घूमने लगता है।
इस शोध से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली है कि परमाणु के स्तर पर बिजली, अणुओं की गति और गति के संचार के बीच किस तरह संबंध बनता है। भविष्य में इस जानकारी का इस्तेमाल ऐसे छोटे इलेक्ट्रॉनिक स्विच और उपकरण विकसित करने में हो सकता है, जिनमें बिजली के प्रवाह को अणुओं की गति से नियंत्रित किया जा सके। वैज्ञानिक यह भी पता लगाना चाहते हैं कि क्या गोलाकार ध्रुवित प्रकाश या विशेष प्रकार की विद्युत धाराओं की मदद से अणुओं की गति को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे प्रकाश और इलेक्ट्रॉनों के चक्रण के जरिए अणुओं की गति को नियंत्रित करने की नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।
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