नई दिल्ली: एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने गुरुवार को ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन सर्विसेज (टीआईपीएस) लॉन्च किया। यह एक समर्पित प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य निर्यातकों, निवेशकों और कारोबारियों को बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद करने के साथ भारत और विदेशों में व्यापार एवं निवेश के अवसरों को सुगम बनाने में सहायता करना है।
यह पहल हाल ही में एसोचैम की मैनेजिंग कमेटी की बैठक के दौरान पेश की गई। इसे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक व्यापक सहायता तंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म आर्थिक शोध, नीतिगत जानकारी और सुविधा सेवाओं को एक साथ लाएगा, ताकि कारोबारी विकास के अवसरों की पहचान कर सकें, नियामकीय प्रक्रियाओं को समझ सकें और नए बाजारों में विस्तार कर सकें।
एसोचैम के अनुसार,टीआईपीएस के तहत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा विश्लेषण, निवेश के अवसरों की जानकारी, नीतिगत और नियामकीय ढांचे की समझ, केंद्र और राज्य सरकारों की सिंगल-विंडो प्रणालियों के जरिए उपलब्ध मंजूरियों और क्लियरेंस को लेकर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
प्लेटफॉर्म पर कराधान, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों, व्यापार समझौतों और उभरते वैश्विक बाजार रुझानों से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल सरकार के विकसित भारत 2047 विजन और मेक इन इंडिया, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा आत्मनिर्भर भारत जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के अनुरूप है।
टीआईपीएस के जरिए एसोचैम का लक्ष्य 2030 तक भारत के वस्तुओं और सेवाओं के संयुक्त वार्षिक निर्यात को 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने और 2032 तक वार्षिक एफडीआई प्रवाह को 2,000 करोड़ डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य में योगदान देना है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य बाजार से जुड़ी जानकारी, नीतिगत अंतर्दृष्टि और सुविधा सेवाओं को एक साथ लाकर भारत की विकास की कहानी को ठोस निवेश अवसरों में बदलना है।
उन्होंने कहा कि टीआईपीएस कारोबारियों को अवसरों की पहचान करने, प्रक्रियाओं को समझने और निवेश की मंशा को परियोजनाओं तथा रोजगार सृजन में बदलने में मदद करेगा। चैंबर ने कहा कि टीआईपीएस भारत की व्यापक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को भी समर्थन देगा। इनमें 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के वार्षिक निर्यात को अलग-अलग 1 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाना, ब्रिक्स देशों को निर्यात बढ़ाकर 2,000 करोड़ डॉलर करना, 2035 तक जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाकर 25 प्रतिशत करना और एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती बढ़ाना शामिल है।
यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को अवसरों की पहचान करने और स्थानों का मूल्यांकन करने से लेकर कारोबारी साझेदार तलाशने में सहायता तक के लिए एंड-टू-एंड सहयोग उपलब्ध कराएगा। यह भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने और संभावित वैश्विक साझेदारों से संपर्क स्थापित करने में भी मदद करेगा।
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