हर साल डूबने से 3 लाख मौतें : डब्ल्यूएचओ ने बताए जान बचाने के 7 असरदार उपाय

Update: 2026-07-24 05:31 GMT
नई दिल्ली: हर साल दुनिया भर में करीब तीन लाख लोग डूबने की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है। आज भी 5 से 14 साल के बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजहों में डूबने से होने वाली मौतें शामिल हैं।
इन चिंताजनक आंकड़ों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 25 जुलाई को वैश्विक स्तर पर मनाए जाने वाले डूबने से बचाव दिवस से पहले एक नया तकनीकी पैकेज लॉन्च किया है। इसका मकसद सरकारों और समुदायों को ऐसे आसान और असरदार उपाय बताना है, जिनसे डूबने से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सके।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि डूबने की ज्यादातर घटनाएं नदियों, तालाबों, झीलों, कुओं, घरों में पानी के बड़े भंडार और स्विमिंग पूलों में होती हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित निम्न और मध्यम आय वाले देश हैं, जहां दुनिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा डूबने की घटनाएं होती हैं।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि हर डूबने की घटना एक त्रासदी है और राहत की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर को रोका जा सकता है। उनका कहना है कि इसके लिए सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि शिक्षा, परिवहन, आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन समेत सभी को मिलकर काम करना होगा।
इसी सोच के साथ डब्ल्यूएचओ ने 'प्रोटेक्ट' नाम से सात प्रमुख उपायों का एक पैकेज तैयार किया है। पहला उपाय है पानी के आसपास सुरक्षित बुनियादी ढांचा तैयार करना, ताकि लोग गलती से पानी में न गिरें। दूसरा, हादसे की स्थिति में तुरंत बचाव और प्राथमिक उपचार यानी रेस्क्यू और सीपीआर जैसी सुविधाओं को मजबूत करना। तीसरा, उन लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जो रोजगार के लिए पानी के आसपास काम करते हैं, जैसे मछुआरे या नाविक।
इसके अलावा चौथा उपाय जल परिवहन को सुरक्षित बनाना है, ताकि नाव या फेरी जैसी सेवाओं में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन हो। पांचवां और बेहद अहम सुझाव है कि बच्चों को स्कूल स्तर पर तैराकी और पानी में सुरक्षित रहने की ट्रेनिंग दी जाए। छठा, छोटे बच्चों की निगरानी और देखभाल की बेहतर व्यवस्था हो, ताकि वे अकेले पानी के पास न जाएं। सातवां उपाय बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के लिए पहले से तैयारी करना है, क्योंकि ऐसे समय में डूबने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन अब डूबने की घटनाओं को और बढ़ा रहा है। दुनिया भर में बाढ़, तूफान और हीटवेव जैसी चरम मौसम की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। गर्मी बढ़ने पर लोग ज्यादा संख्या में नदियों, झीलों और स्विमिंग पूल का रुख करते हैं, जिससे हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।
ब्रिटेन में हुई एक स्टडी का हवाला देते हुए डब्ल्यूएचओ ने बताया कि तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ डूबने से होने वाली मौतों में करीब 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं जिन दिनों तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है, उन दिनों डूबने का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में करीब पांच गुना तक बढ़ जाता है।
इस साल डब्ल्यूएचओ ने अपना नया तकनीकी पैकेज अफ्रीकी देश घाना में लॉन्च किया है। इसकी वजह यह है कि घाना में हर साल करीब 1,100 लोगों की डूबने से मौत होती है, यानी औसतन हर दिन तीन लोगों की जान चली जाती है। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और युवा शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि अगर घाना जैसे देश इन उपायों को सही तरीके से लागू करें, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
इस अभियान को ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज का भी समर्थन मिला है। संस्था का कहना है कि डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जो उपाय सुझाए गए हैं, वे पहले से कई देशों में कारगर साबित हुए हैं और अब इन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की जरूरत है।
इस बार विश्व डूबने से बचाव दिवस की थीम है "हालात बदलने के लिए एकजुट हों।" इसके पीछे का मोटिव है कि अगर सरकारें, स्थानीय प्रशासन, स्कूल, परिवार और समुदाय मिलकर काम करें, तो हर साल होने वाली हजारों नहीं, बल्कि लाखों मौतों को रोका जा सकता है।
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