'गलत नंबर डायल किया है, जाकर प्रदर्शन करो', याचिकाकर्ता से बोले CJI सूर्यकांत
दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन की व्यवस्था लागू करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी मांग गलत जगह लेकर आए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कानून बनाना या उसमें बदलाव करना संसद का अधिकार क्षेत्र है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि कई विधानसभा सीटें दशकों से आरक्षित बनी हुई हैं। इससे चुनाव लड़ने के इच्छुक अन्य वर्गों के उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि याचिकाकर्ता ने गलत नंबर मिलाया है और यह धरना-प्रदर्शन का मौसम है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मुद्दे को जनप्रतिनिधियों और संसद के समक्ष उठाया जाना चाहिए।
यह मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की कादीपुर विधानसभा सीट से जुड़ा है। याचिकाकर्ता जगदीश सिंह का कहना था कि यह सीट लगभग सात दशकों से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उन्होंने लंबे समय तक एक ही निर्वाचन क्षेत्र को आरक्षित रखने की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
अदालत के समक्ष परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(सी) की वैधता का मुद्दा भी उठाया गया। यह प्रावधान आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आरक्षित सीटों के रोटेशन संबंधी नीतिगत निर्णय संसद को लेने हैं। अदालत के फैसले के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और विधायी स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।