योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की
काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प यात्रा के समापन समारोह के बीच बुधवार को काशी में आस्था का एक भावपूर्ण दृश्य सामने आया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में माथा टेका और इसके बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने राष्ट्र के सुख, समृद्धि, शांति और लोककल्याण की कामना की। दोनों मुख्यमंत्री सबसे पहले बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचे। काशी की परंपरा में बाबा काल भैरव को काशी का कोतवाल माना जाता है। मंदिर पहुंचने पर दोनों ने विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चार के बीच आरती में भी शामिल हुए। बाबा काल भैरव के समक्ष शीश नवाकर दोनों ने देश और प्रदेश के कल्याण की कामना की।
बाबा काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों के प्रति स्नेह भी देखने को मिला। मंदिर परिसर में मौजूद बच्चों को उन्होंने आत्मीयता के साथ चॉकलेट बांटी। मुख्यमंत्री का यह सहज व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। काल भैरव के दर्शन के बाद दोनों मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हुए। बाबा विश्वनाथ के धाम पहुंचकर दोनों ने विधिवत दर्शन-पूजन किया।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दोनों मुख्यमंत्रियों ने गर्भगृह में जाकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया। इसके बाद जलाभिषेक किया और षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ की आराधना करते हुए दोनों ने राष्ट्र के सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की। कामाख्या की धरती असम से आए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और बाबा विश्वनाथ की नगरी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक साथ विश्वनाथ मंदिर में पहुंचना काशी की उस आध्यात्मिक परंपरा को भी सामने लाया, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों की आस्था एक ही धारा में आकर मिलती है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इससे पहले सेवा संकल्प यात्रा के समापन समारोह में भी काशी और बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि वह कामाख्या की धरती से बाबा विश्वनाथ की धरती को प्रणाम करने आए हैं। इसी भाव की झलक बुधवार को मंदिरों में भी दिखाई दी। असम की कामाख्या और उत्तर प्रदेश की काशी, दो अलग भूगोल लेकिन एक साझा आस्था। बाबा काल भैरव के दरबार से शुरू हुआ यह दर्शन क्रम बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह तक पहुंचा।