नदिया। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में दिग्गज अभिनेता और राज्य सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के सलाहकार मिथुन चक्रवर्ती ने प्रदेश में त्योहारों के आयोजन और मौजूदा माहौल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब हर तरफ खुशी और उत्साह का माहौल है। लोग स्वतंत्र रूप से पूजा-पाठ और त्योहार मना रहे हैं। किसी को भी यहां घुटन महसूस करने की जरूरत नहीं है। मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि यह एक स्वतंत्र बंगाल है, जहां लोगों को अपनी आस्था और परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाने की आजादी मिली हुई है। उन्होंने पूजा आयोजनों की बढ़ती संख्या को भी इसी स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।
पूजा आयोजनों को लेकर कही बड़ी बात
मिथुन चक्रवर्ती ने कहा, "हर तरफ खुशी और उत्साह है। यहां कोई घुटन महसूस नहीं कर सकता। यह एक स्वतंत्र बंगाल है और इसी वजह से हर कोई खुशियां मना रहा है। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि राज्य में पूजा आयोजनों की संख्या क्यों बढ़ रही है। उनके मुताबिक, लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की स्वतंत्रता दी गई है। अभिनेता ने कहा कि लोग पूजा करें, त्योहार मनाएं और उत्सव का आनंद उठाएं। यही वह चीज है जिसकी पश्चिम बंगाल के लोगों को जरूरत थी।
बंगाल की सांस्कृतिक पहचान पर जोर
मिथुन चक्रवर्ती लंबे समय से बंगाली सिनेमा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। हाल ही में उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में सलाहकार नियुक्त किया गया है। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है।नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मिथुन चक्रवर्ती राज्य की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय हैं। उन्होंने राज्य में ऐसे स्थानों की पहचान करने की बात कही है, जिन्हें पर्यटन के लिए विकसित किया जा सकता है।
 
त्योहारों की बढ़ती संख्या को बताया सकारात्मक संकेत
मिथुन चक्रवर्ती ने अपने बयान में पूजा और धार्मिक आयोजनों की बढ़ती संख्या का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोगों को उत्सव मनाने की स्वतंत्रता मिलने से राज्य में खुशी का वातावरण दिखाई दे रहा है।इससे पहले भी मिथुन चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल को भयमुक्त बताते हुए त्योहारों में लोगों की भागीदारी पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। नदिया में दिए गए उनके ताजा बयान में भी धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक आयोजनों और उत्सवों में लोगों की भागीदारी प्रमुख विषय रहे। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को ऐसी ही स्वतंत्रता की जरूरत थी।
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