नई दिल्ली: भारत अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आने वाले समय में किस आधुनिक लड़ाकू विमान को चुनेगा, इस सवाल पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 को लेकर लंबे समय से अलग-अलग संभावनाएं जताई जा रही हैं। इसी बीच भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने दोनों विमानों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने अभी तक भारत को F-35 बेचने की आधिकारिक पेशकश नहीं की है। वहीं, रूसी विमान के मामले में सरकार की तरफ से भी आगे की प्रक्रिया तय होना बाकी है।
आज के समय में हवाई युद्ध केवल तेज रफ्तार और मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक लड़ाकू विमानों में ऐसी तकनीक इस्तेमाल की जाती है, जिससे वे दुश्मन की निगरानी प्रणाली से बचते हुए ही अपने अभियान पूरे कर सकें। पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। इनमें स्टील्थ तकनीक, आधुनिक सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी क्षमताएं होती हैं।
भारत के लिए ऐसे विमानों का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि भविष्य में वायुसेना को बदलती सुरक्षा चुनौतियों के हिसाब से अपनी तैयारी मजबूत रखनी होगी। हालांकि, किसी विदेशी विमान की खरीद से पहले उसकी कीमत, तकनीकी सुविधाओं और लंबे समय तक इस्तेमाल से जुड़े खर्च का आकलन भी जरूरी होता है।
जोधपुर में अमेरिकी अधिकारियों की मौजूदगी में उठा सवाल
राजस्थान के जोधपुर में बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति-2026 के समापन अवसर पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान अमेरिकी प्रशांत वायु सेना के कमांडर भी मौजूद थे। बातचीत में F-35 की संभावित बिक्री का मुद्दा सामने आया।
वायुसेना प्रमुख ने जवाब में अमेरिकी विमान तक भारतीय अधिकारियों की सीमित पहुंच का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विमान के करीब जाने की अनुमति नहीं मिलती, तो उसकी बिक्री की चर्चा कैसे की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि F-35 के लिए भारत को कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
रूस की तरफ से Su-57 विमान की पेशकश की जानकारी भारतीय वायुसेना प्रमुख के संज्ञान में है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एपी सिंह के मुताबिक, अभी सरकार के स्तर पर आगे का रास्ता तय होना है।
F-35 और Su-57 की तकनीक में क्या अंतर है?
अमेरिकी F-35 को खास तौर पर कम रडार दृश्यता और आधुनिक सेंसर प्रणाली के लिए जाना जाता है। यह विमान युद्ध के दौरान अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को पायलट तक पहुंचाने में सक्षम है। दूसरी तरफ रूस का Su-57 स्टील्थ तकनीक के साथ तेज रफ्तार, हवा में बेहतर नियंत्रण और आधुनिक हथियारों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
दोनों विमानों की अपनी तकनीकी विशेषताएं हैं। इसलिए केवल उनकी पीढ़ी के आधार पर किसी एक को भारत के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
सरकार के फैसले पर टिकी है आगे की प्रक्रिया
वायुसेना प्रमुख के बयान से फिलहाल दो बातें स्पष्ट हैं। पहली, अमेरिका से F-35 की औपचारिक पेशकश नहीं आई है। दूसरी, रूस के Su-57 को लेकर सरकारी निर्णय के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
भारत को किसी भी नए लड़ाकू विमान का चयन करते समय प्रशिक्षण, रखरखाव, हथियारों की उपलब्धता और मौजूदा सैन्य व्यवस्था के साथ उसके तालमेल को भी देखना होगा। ऐसे में F-35 और Su-57 को लेकर चर्चाएं भले जारी हों, लेकिन भारतीय वायुसेना में इनमें से किसी विमान के शामिल होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
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