नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्वाड देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ देशों को अपनी पसंद के अनुसार आर्थिक और रणनीतिक फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके लिए मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना और गैर-बाजार प्रथाओं का मुकाबला करना जरूरी है।
शनिवार को अमेरिका के अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इसमें भारत के जयशंकर के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुईं। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चर्चा के प्रमुख मुद्दों की जानकारी दी।
उन्होंने क्वाड के एजेंडे को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के हिसाब से अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने की बात कही। बैठक में तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देशों को मिले फैसले लेने की आजादी
जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखना क्वाड की साझा जिम्मेदारी है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र के देशों को अपनी जरूरतों और हितों के अनुसार फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
उनके मुताबिक, तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए क्वाड देशों को मिलकर ऐसे विकल्प तैयार करने चाहिए, जिससे सप्लाई चेन मजबूत और सुरक्षित बन सके।
विदेश मंत्री ने गैर-बाजार प्रथाओं और आर्थिक दबाव के मुद्दे को भी चर्चा का हिस्सा बताया। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी देश का नाम नहीं लिया और न ही यह स्पष्ट किया कि किन गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है।
AI के क्षेत्र में 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा की मदद
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल और इसकी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद AI तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की इच्छा जताई।
इस सहयोग में 'क्वाड AI एक्सेलेरेटर' के जरिए मिलने वाली मदद भी शामिल है। बैठक की विज्ञप्ति में सुपर इंटेलिजेंस का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ दिए गए स्पष्टीकरण में बताया गया कि यह शब्द भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित है। इस पहल का मकसद क्षेत्र के देशों को नई तकनीक के विकास और इस्तेमाल में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने पर भी जोर
क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रीसाइक्लिंग को भी अहम माना है। बैठक में भारत और आसियान देशों में कचरे से उपयोगी खनिज निकालने वाली सुविधाएं विकसित करने के लिए अमेरिका की ओर से 10 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता का स्वागत किया गया। यह राशि केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ऐसी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए है।
दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ में कई ऐसे खनिज मौजूद होते हैं, जिनका इस्तेमाल आधुनिक तकनीक और उद्योगों में किया जाता है। इन्हें दोबारा उपयोग में लाने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। चारों देश रीसाइक्लिंग से मिलने वाली सामग्री को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने की प्रक्रिया आसान बनाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे।
समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की तैयारी
बैठक में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने के मुद्दे भी उठे। जयशंकर ने कहा कि क्वाड देशों को पहले से मौजूद समझौतों और सहयोग कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना चाहिए। इससे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी।
समुद्री सहयोग के तहत चारों देशों के प्रतिनिधियों ने 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच चेन्नई से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ तक भारतीय तटरक्षक बल के एक गश्ती जहाज पर यात्रा की थी। इस तरह की गतिविधियों से अलग-अलग देशों के सुरक्षा बलों के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है क्वाड और इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं?
क्वाड चार देशों का समूह है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना है। इस समूह के एजेंडे में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक विकास, महत्वपूर्ण और उभरती तकनीक, सुरक्षित सप्लाई चेन तथा आपदा के समय मानवीय सहायता जैसे विषय शामिल हैं।
बैठक के दौरान जयशंकर ने जी20 में ऊर्जा आपूर्ति के राजनीतिकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कमी का सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक दबाव का माध्यम बनाना नुकसानदायक है। उन्होंने जी20 देशों से इस चुनौती को गंभीरता से समझने की अपील की। क्वाड और जी20 की बैठकों में उठाए गए इन मुद्दों से साफ है कि भारत ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अधिक मजबूत और संतुलित बनाने पर जोर दे रहा है।
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