पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ योजनाएं नहीं, सुरक्षा और रोजगार चाहती हैं बंगाल की महिलाएं
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे महिलाओं की उम्मीदें भी साफ और मजबूत होती जा रही हैं। राज्य की महिलाएं अब सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वे सम्मान, सुरक्षा, रोजगार और दीर्घकालिक सशक्तिकरण की मांग कर रही हैं।
राज्य की अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि अगली सरकार को मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाने, सुरक्षा मजबूत करने और स्थायी विकास पर ध्यान देना होगा।
कई महिलाएं मानती हैं कि लक्ष्मीर भंडार और कन्याश्री जैसी योजनाओं ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। इनसे आर्थिक मदद मिली है और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिला है। उनका कहना है कि सशक्तीकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
प्रसिद्ध गायिका उज्जयिनी मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, "बंगाल की महिलाएं शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। लक्ष्मी भंडार और कन्याश्री जैसी योजनाएं एक अच्छा कदम हैं, लेकिन लंबे समय के सशक्तिकरण के लिए ज्यादा अवसर, जागरूकता और पेशेवर विकास में समान पहुंच जरूरी है।"
सांस्कृतिक क्षेत्र, जो पश्चिम बंगाल की पहचान रहा है, वहां भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। उज्जैनी मुखर्जी का कहना है कि राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन संस्थागत समर्थन उतना मजबूत नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली सरकार सांस्कृतिक ढांचे को मजबूत करेगी, कलाकारों को निष्पक्ष अवसर देगी और एक पारदर्शी सपोर्ट सिस्टम बनाएगी।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कलाकारों और तकनीशियनों के लिए पेंशन योजना होनी चाहिए, साथ ही स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए, खासतौर पर उन लोगों के लिए जो बीमारी, उम्र या बेरोजगारी के कारण काम नहीं कर पाते।
वहीं, सुरक्षा का मुद्दा भी महिलाओं के लिए बेहद अहम बना हुआ है। कई महिलाओं ने माना कि कानून-व्यवस्था सुधारने के प्रयास हुए हैं, लेकिन इसका प्रभाव जमीन पर लगातार और मजबूत तरीके से दिखना चाहिए।
एक शिक्षा कंपनी में कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेशनल सुचिस्मिता बागची ने कहा, "लोगों का कानून-व्यवस्था पर भरोसा होना चाहिए। पुलिस को स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्रवाई की पूरी ताकत मिलनी चाहिए। अब समय आ गया है कि वह राजनीतिक दबाव से बाहर निकलकर काम करे।"
उन्होंने सरकार से पारदर्शिता की भी मांग की और कहा कि बजट आवंटन, उसके उपयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर व्हाइट पेपर जारी किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को स्पष्ट जानकारी मिल सके। साथ ही, नए व्यवसायों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बेहतर माहौल बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जो स्कूल पिछले वर्षों में बंद हो गए हैं, उन्हें फिर से खोला जाना चाहिए और स्कूलों, कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में खाली पदों को भरने के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसके अलावा बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में नागरिक शास्त्र, अधिकार और कर्तव्यों से जुड़ा विषय शामिल करने की जरूरत बताई।
उद्यमी, इंजीनियरिंग कंसल्टेंट और गायिका अनिंदिता मैता दास का मानना है कि केवल मुफ्त योजनाएं महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं कन्याश्री जैसी योजनाओं का समर्थन करती हूं, लेकिन सिर्फ फ्रीबीज से महिलाओं का विकास नहीं हो सकता। इससे निर्भरता बढ़ती है और लंबे समय में नुकसान हो सकता है। योजनाएं वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित नहीं होनी चाहिए।"
उन्होंने राज्य से युवाओं के पलायन पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा बंगाल छोड़कर जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए बड़े स्तर पर औद्योगिकीकरण जरूरी है, ताकि राज्य में ही नौकरी के अवसर पैदा हों और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के छात्र बाहर जाने को मजबूर न हों। उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, खासकर निजी मेडिकल कॉलेजों में, का भी विरोध किया।
गृहिणी स्तुति कर्मकार ने महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा, "आज की सबसे बड़ी जरूरत है कि महिलाओं को अपने अधिकारों का पूरा लाभ मिले। उन्हें सुरक्षित और शांत माहौल में काम करने का अधिकार होना चाहिए। उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। हम फिर से आरजी कर जैसे हादसे नहीं देखना चाहते। हर महिला को अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित महसूस होना चाहिए, चाहे वह सरकारी हो या निजी।"