नई दिल्ली: राजनीति में पद की अहमियत होती है, लेकिन क्या बिना किसी पद के भी समाज में अपनी पहचान बनाई जा सकती है? राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जोधपुर में स्कूली बच्चों के सामने इसी सवाल से जुड़ी कई मिसालें रखीं। उन्होंने बच्चों को बताया कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए किसी बड़े पद, पहचान या खास मौके का इंतजार करना जरूरी नहीं है। असली बात यह है कि इंसान अपने आसपास की परेशानियों को समझे और उन्हें दूर करने के लिए खुद पहल करे।
जोधपुर के एक निजी स्कूल में आयोजित मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) कार्यक्रम में पहुंचीं राजे ने विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत की। कार्यक्रम में वोट देने की न्यूनतम उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बच्चों की भागीदारी देखकर राजे ने उनकी तारीफ की और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।
बच्चों से बातचीत के दौरान राजे ने अपने अंदाज में कहा कि उन्हें भी कोई पद नहीं मिला है और मजाकिया लहजे में एक छोटा पद दिलाने की बात कही। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि अगर कोई व्यक्ति केवल पद मिलने का इंतजार करता रहेगा, तो उसके काम शुरू करने में ही देर होती रहेगी।
उन्होंने कहा कि अपनी क्षमता साबित करने के लिए पहले से किसी पद पर बैठना जरूरी नहीं है। लोग अपने काम से भी पहचान बना सकते हैं। बच्चों को अपनी पसंद का रास्ता चुनना चाहिए और उस पर आगे बढ़ने का साहस दिखाना चाहिए। उनके मुताबिक, युवाओं को अपनी बात रखने, फैसले लेने और जिम्मेदारी संभालने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
दो कमरों से कारोबार शुरू करने की मिसाल
अपनी बात समझाने के लिए राजे ने जयपुर रग्स के संस्थापक नंदकिशोर चौधरी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चौधरी ने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया और बुनकरों को जोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया। इसी तरह उन्होंने अमृता देवी बिश्नोई के बलिदान को याद किया, जिन्होंने पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी थी।
इन उदाहरणों के जरिए राजे ने बताया कि बड़े बदलाव के लिए शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन इरादा मजबूत होना चाहिए। उन्होंने बच्चों को गांवों और छोटे कस्बों में जाकर लोगों की समस्याएं समझने तथा समाज के लिए काम करने की भी सलाह दी।
राजस्थान की धूप बनी बिजली बनाने का जरिया
राजे ने राजस्थान की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने कई ऐसी चीजों को ताकत में बदला है, जिन्हें पहले परेशानी माना जाता था। उन्होंने जोधपुर के पास भड़ला में सौर ऊर्जा उत्पादन का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, जिस तेज धूप को कभी चुनौती समझा जाता था, उसी से आज बड़े पैमाने पर बिजली पैदा की जा रही है।
उन्होंने मधुमक्खियों के काम का उदाहरण देकर सामूहिक प्रयासों की अहमियत भी समझाई। एक मधुमक्खी बहुत कम शहद तैयार करती है, लेकिन हजारों मधुमक्खियों का मिलाजुला प्रयास एक बड़ा छत्ता बना देता है। राजे का संदेश था कि किसी व्यक्ति का छोटा योगदान भी समाज के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
बेटियों की पढ़ाई और महिलाओं की आर्थिक मजबूती
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। उन्होंने बेटियों को साइकिल देने की पहल का जिक्र किया, ताकि स्कूल दूर होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
राजे ने उद्योगों और दूसरे क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं की उपलब्धियों पर खुशी जताई। उन्होंने फिक्की और सीआईआई जैसे कारोबारी संगठनों में महिलाओं की भागीदारी का जिक्र किया। साथ ही आशा सहयोगिनियों के काम को भी महत्वपूर्ण बताया।
गांवों की कहानियों से समझाया बदलाव का मतलब
कार्यक्रम में बच्चों को बीकानेरी भुजिया और जयपुर रग्स जैसे उदाहरणों से स्थानीय काम को बड़े स्तर तक पहुंचाने की बात समझाई गई। राजे ने राजसमंद जिले के पिपलांत्री गांव का भी उल्लेख किया.
उन्होंने मीडिया की भूमिका पर बात करते हुए पत्रकारों से भी कहा कि जहां कोई गड़बड़ी हो रही हो, वहां लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है।
राजे की पूरी बातचीत का जोर इस बात पर रहा कि युवाओं को अपनी शुरुआत के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं समझनी चाहिए। गांव हो या शहर, सीमित साधन हों या कम पहचान, आगे बढ़ने का रास्ता मेहनत, पहल और जिम्मेदारी से निकल सकता है।
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