नई दिल्ली: त्रिनिदाद और टोबैगो भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। भारत में त्रिनिदाद और टोबैगो के हाई कमिश्नर चंद्रदाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि उनका देश इस डिजिटल पेमेंट टेक्नोलॉजी को अपनाने वाला पहला कैरिबियाई देश बन गया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर भी ज़ोर दिया।

त्रिनिदाद और टोबैगो के गणतंत्र बनने की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में हाई कमिश्नर ने कहा कि UPI पहल पर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और त्रिनिदाद और टोबैगो के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्रालय के बीच एक अहम समझौते के तहत तेज़ी से काम किया जा रहा है।

हाई कमिश्नर ने कहा कि इस पहल का मकसद कैरिबियाई देश में एक रियल-टाइम और कुशल डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाना है, जो डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग के मामले में भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाता है।

दोनों देशों के बीच गहरे होते रिश्तों का ज़िक्र करते हुए हाई कमिश्नर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा के दौरान छह समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इससे लोगों के बीच आपसी संबंध, व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को मज़बूत करने की नींव पड़ी।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच राजनयिक संबंधों के 64 साल पूरे हो रहे हैं। साथ ही, उन्होंने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को भी रेखांकित किया, क्योंकि 181 साल पहले भारतीय मज़दूर त्रिनिदाद आए थे।

हाई कमिश्नर ने कहा, "हमारे दोस्तों के बीच बातचीत और सहयोग का स्तर मज़बूत है और यह हम दोनों के लिए फायदेमंद है।"

आर्थिक सहयोग पर बात करते हुए हाई कमिश्नर ने बताया कि त्रिनिदाद और टोबैगो प्राकृतिक गैस का एक बड़ा उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि देश ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, पर्यटन, बायोटेक्नोलॉजी और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ में निवेश के ज़रिए अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने बताया कि त्रिनिदाद और टोबैगो 1908 से तेल के कारोबार से जुड़ा हुआ है और प्राकृतिक गैस का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पिछले पांच सालों में यहाँ हर दिन लगभग 3.3 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट गैस का उत्पादन हुआ है।

उन्होंने कहा कि देश की GDP में ऊर्जा क्षेत्र का योगदान लगभग 35.7 प्रतिशत है और कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 78 प्रतिशत है। हाई कमिश्नर ने शेल, बीपी, एक्सॉनमोबिल और दूसरी कंपनियों के साथ चल रहे एनर्जी प्रोजेक्ट्स का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स में करोड़ों डॉलर का निवेश शामिल है और इनसे रोज़गार के मौके पैदा हो सकते हैं।

देश की बढ़ती डिप्लोमैटिक भूमिका का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि त्रिनिदाद और टोबैगो ने 2027-28 के कार्यकाल के लिए यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में एक नॉन-परमानेंट सीट हासिल की है। इसके लिए वोटिंग के एक ही राउंड में 190 में से 181 वोट मिले।

उन्होंने भारत के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि UNSC की मेंबरशिप से त्रिनिदाद और टोबैगो को ग्लोबल शांति, सुरक्षा, विकास और इंटरनेशनल सहयोग पर चर्चा में योगदान देने का मौका मिलेगा।

उन्होंने बताया कि देश का कैंपेन छोटे हथियारों और हल्के हथियारों की अवैध तस्करी को रोकने, महिलाओं और बच्चों की तस्करी को कम करने के लिए इंटरनेशनल पॉलिसी बनाने, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व ग्लोबल सिक्योरिटी पर केंद्रित है।

हाई कमिश्नर ने त्रिनिदाद और टोबैगो के हेल्थकेयर और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेक्टर में भारत के योगदान पर भी ज़ोर दिया। इसमें भारत के फार्माकोपिया स्टैंडर्ड्स को मान्यता देना और यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्ट इंडीज़ में आयुर्वेद पर एक इंडियन चेयर स्थापित करने का समझौता शामिल है।

उन्होंने स्थानीय स्कूली बच्चों को लैपटॉप देने और जयपुर फुट पहल के ज़रिए मेडिकल सहायता देने में भारत के समर्थन का भी ज़िक्र किया।

दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर ज़ोर देते हुए हाई कमिश्नर ने कहा कि भारतीय मूल के समुदायों ने त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्रीय जीवन को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। उनके ऐतिहासिक संबंध वहां की राजनीति, संस्कृति और समाज में झलकते हैं।

उन्होंने दोनों देशों के बीच क्रिकेट को एक बड़े पुल के तौर पर भी रेखांकित किया और भारत व वेस्ट इंडीज़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे खेल संबंधों को याद किया।

हाई कमिश्नर ने अपनी बात खत्म करते हुए भारत के "वसुधैव कुटुंबकम" (यानी "दुनिया एक परिवार है") के यूनिवर्सल संदेश का ज़िक्र किया और दोनों देशों के बीच और मज़बूत सहयोग का आह्वान किया।

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