घने स्मॉग की चादर में लिपटी राजधानी, इंडिया गेट के आसपास AQI 394 दर्ज

यातायात व्यवस्था

Update: 2025-12-30 19:03 GMT
Delhi दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। इंडिया गेट और उसके आसपास के इलाकों में घने स्मॉग की परत छाई हुई है, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, इंडिया गेट क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 394 दर्ज किया गया है, जिसे ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में रखा गया है। सुबह से ही राजधानी के कई हिस्सों में आसमान धुंधला नजर आया। स्मॉग के कारण ऐतिहासिक इंडिया गेट समेत आसपास की इमारतें भी धुंध में ढकी दिखाई दीं। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस के रोगियों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।
सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, AQI 300 से ऊपर होने पर हवा स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो जाती है। 394 का स्तर यह संकेत देता है कि लंबे समय तक बाहर रहने या शारीरिक गतिविधि करने से लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और यदि बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क का उपयोग करें। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में कम तापमान, हवा की गति कम होना और नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक फंसे रहते हैं। इसके अलावा, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य, औद्योगिक गतिविधियां और पराली जलाने जैसे कारण भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में योगदान देते हैं।
स्मॉग का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में दृश्यता कम होने से वाहन चालक धीमी गति से गाड़ियां चला रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने चालकों से सावधानी बरतने और हेडलाइट व फॉग लाइट का सही उपयोग करने की अपील की है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई प्रतिबंध पहले से ही लागू हैं। इनमें निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल जेनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध और कुछ औद्योगिक गतिविधियों को सीमित करना शामिल है। प्रशासन का कहना है कि हालात के अनुसार और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक ‘बहुत खराब’ श्रेणी की हवा में सांस लेने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अस्पतालों में सांस की तकलीफ, खांसी और एलर्जी से जुड़े मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। कई लोगों का कहना है कि दिल्ली में हर सर्दी के मौसम में यही हालात बन जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम अब भी नाकाफी नजर आते हैं। लोगों ने सरकार से दीर्घकालिक उपाय लागू करने की मांग की है, ताकि राजधानी को इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक हवा की गति धीमी रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषण में तुरंत राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, तेज हवाओं या हल्की बारिश की स्थिति बनने पर वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। फिलहाल, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, बाहर की गतिविधियों को सीमित रखें और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। दिल्ली की हवा में घुलता स्मॉग एक बार फिर इस बात की चेतावनी है कि वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
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