गगरेट। ‘मुंडे ने कमाल कर दित्ता। सानू एह पता ही नहीं सी कि मुंडा लंबी छलांग दा वी खिलाड़ी है। जेड़ा लॉन्ग जंप विच गोल्ड लै गया, ओह हाई जंप विच वी गोल्ड ही ले के आएगा। रछपाल दे मुंडे ने तां पिंड दा नाम रौशन कर दित्ता।’ भारत के स्टार पैरा एथलीट निषाद कुमार के पैरा एशियन गेम्स में टी-47 वर्ग की लंबी कूद स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनके गांव में कुछ इसी अंदाज में खुशी का इजहार हो रहा है। निषाद की इस उपलब्धि ने न केवल गांव का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। बचपन में घास काटने वाली मशीन की चपेट में आने से निषाद ने अपना एक हाथ गंवा दिया था। यह हादसा किसी भी बच्चे के सपनों को तोडऩे के लिए काफी था, लेकिन निषाद ने अपनी मेहनत, जुनून और मजबूत इरादों से साबित कर दिया कि शारीरिक बाधाएं कामयाबी की राह नहीं रोक सकतीं। आज अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर तिरंगे की शान बढ़ा रहे निषाद की सफलता हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कटौहड़ खुर्द से स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद निषाद जब पंचकूला पहुंचे तो उनके खेल सफर को दिशा देने में कोच नसीम अहमद की अहम भूमिका रही। यहीं से उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और एशियन यूथ पैरा गेम्स में पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी दर्ज करवाई। हाई जंप की बारीकियां सीखने के लिए उन्हें बंगलुरु में कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में भेजा गया। निषाद की सीखने की ललक, अनुशासन और मेहनत देखकर कोच को भी अहसास हो गया था कि यह खिलाड़ी लंबी मंजिल तय करने की क्षमता रखता है। कोच के मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास ने उनकी प्रतिभा को निखारा और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उम्मीद बनकर उभरे।