नई दिल्ली: राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने लगेज ट्रॉलियों के जरिए सोने की तस्करी के एक मामले में 1.3 किलोग्राम सोने के बिस्कुट जब्त किए हैं। जब्त किए गए सोनो की कीमत 1.8 करोड़ बताई गई है। आरोप है कि दो आरोपियों ने मलेशिया के कुआलालंपुर से सोना लाया और उन्हें लगेज ट्रॉलियों में चिपकाकर छिपा दिया।
आरोपियों ने उन भोले-भाले यात्रियों को निशाना बनाया जो इन ट्रॉलियों में बैठकर सीमा शुल्क पार कर रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने यात्रियों का पीछा किया और बाद में ट्रॉलियों से सोना निकाल लिया। उन्होंने भोले-भाले यात्रियों को अनजाने में वाहक बनाकर उनकी जानकारी के बिना ही सोना ढोया।
प्राप्त सूचना के आधार पर डीआरआई अधिकारियों ने सोना जब्त कर लिया। जांच में आरोपियों के कथित तस्करी नेटवर्क और भोले-भाले यात्रियों के जरिए सोना ढोने के तरीके पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।
इससे पहले 25 सितंबर को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की मुंबई जोनल यूनिट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगभग 14.81 करोड़ रुपए कीमत का 9.40 किलोग्राम सोना जब्त किया था। इस दौरान तीन भारतीय यात्रियों को गिरफ्तार भी किया था।
मुंबई एयरपोर्ट कस्टम्स की एयर इंटेलिजेंस यूनिट की ऑपरेशनल मदद से खास खुफिया जानकारी के आधार पर 23 सितंबर को यह कार्रवाई की गई। दुबई से आए तीन यात्रियों के पास सोने को बहुत चालाकी से छिपाकर ले जाया जा रहा था।
सामान की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि विदेशी मूल के सोने को बारीक पाउडर में बदलकर, उसी रंग, बनावट और रूप-रंग वाले पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स में बहुत सावधानी से मिलाया गया था। यह तरीका आम जांच से बचने के लिए अपनाया गया था।
सोने के पाउडर को दूध पाउडर, ओट्स, अलग-अलग तरह के आटे, न्यूटेला और नारियल के दूध के पाउडर जैसे आम दिखने वाले फूड पैकेट्स में छिपाया गया था। तीनों यात्रियों के सामान से कुल मिलाकर लगभग 33.50 किलोग्राम ऐसे फूड प्रोडक्ट्स बरामद किए गए, जिनमें सोने का पाउडर मिला हुआ था।
सावधानीपूर्वक अलग करने और जांच के बाद डीआरआई अधिकारियों ने 9.40 किलोग्राम शुद्ध सोना बरामद किया। जब्त किए गए सोने की कीमत लगभग 14.81 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस खेप को कस्टम्स एक्ट, 1962 के संबंधित प्रावधानों के तहत जब्त किया गया।
पूछताछ के दौरान तीनों यात्रियों ने स्वीकार किया कि वे सोने की तस्करी करने वाले एक ही संगठित गिरोह के लिए काम कर रहे थे। कस्टम्स ने उन्हें कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत गिरफ्तार कर लिया।