सैन्य अड्डे के ऊपर मंडरा रहे संदिग्ध ड्रोन को सेना ने मार गिराया

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Update: 2026-06-02 01:35 GMT

मेरठ।  संवेदनशील सैन्य क्षेत्र (कैंट) में लगातार तीन दिनों तक ड्रोन देखे जाने की सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि 28 से 30 मई के बीच रात के समय कैंट इलाके में कुल पांच ड्रोन कैमरे उड़ते हुए देखे गए। ड्यूटी पर तैनात सेना के जवानों ने इनकी गतिविधियों को नोटिस किया और वीडियो भी रिकॉर्ड की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दो ड्रोन को नष्ट कर दिया गया, जबकि तीन अन्य ड्रोन का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।

सेना के अधिकारियों ने इस मामले की जानकारी पुलिस प्रशासन को भी दी है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और सैन्य अधिकारियों की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। नष्ट किए गए ड्रोन का मलबा तलाशने के लिए जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक खोजबीन की गई, लेकिन अब तक कोई अवशेष बरामद नहीं हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन का मलबा मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वे किस प्रकार के थे और उनका उद्देश्य क्या था।

वीडियो की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि ड्रोन में हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे हो सकते हैं। सैन्य क्षेत्र में उनकी मौजूदगी को गंभीर सुरक्षा चुनौती माना जा रहा है। सेना की ओर से इस संबंध में डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी अविनाश पांडेय को भी सूचना दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी के नेतृत्व में पुलिस टीम को सैन्य क्षेत्र में जांच के लिए भेजा गया। सरधना रोड, कंकरखेड़ा, आरवीसी और गंगानगर समेत कई इलाकों में जांच का दायरा बढ़ाया गया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि ड्रोन संचालकों तक पहुंचा जा सके।

सूत्रों के मुताबिक सोमवार को भी दिन और रात के समय कुछ संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की जानकारी मिली है। इसके बाद सभी संबंधित थानों को अलर्ट कर दिया गया है। वहीं सेना ने भी सैन्य क्षेत्र में रात के समय गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन उड़ाने वालों की पहचान और उनके मकसद का पता लगाने में जुटी हैं। हाल के जासूसी मामलों को देखते हुए जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना दंडनीय अपराध है, जिसमें एफआईआर दर्ज होने के साथ एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। पुलिस और सेना की संयुक्त टीम ड्रोन उड़ाने वालों के उद्देश्य और पहचान का पता लगाने में लगी हुई है।

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