आतंकी साजिश का खुलासा, IED ब्लास्ट केस सुलझाने का दावा, हथियार और ग्रेनेड बरामद
अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में पुलिस ने आतंकवादी गतिविधियों और देशविरोधी अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अमृतसर देहात पुलिस ने खासा कैंट में मई 2026 में हुए आईईडी विस्फोट के मामले को सुलझाने का दावा किया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, केंद्रीय एजेंसी के साथ संयुक्त अभियान में पुलिस ने एक 9 एमएम ग्लॉक पिस्टल और एक हैंड ग्रेनेड बरामद किया है। पुलिस ने दोनों मामलों में कुल छह संदिग्धों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है।
मई में हुआ था आईईडी विस्फोट
बॉर्डर रेंज के आईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि 5 और 6 मई 2026 की दरमियानी रात खासा कैंट की दीवार के बाहर आईईडी विस्फोट हुआ था। इस मामले में पुलिस ने रमनदीप, जजप्रीत और अर्शदीप को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि रमनदीप और जजप्रीत कथित तौर पर सीमा क्षेत्र से आईईडी लेकर आए थे। इसके बाद बाहरी हैंडलरों के निर्देश पर विस्फोटक अर्शदीप और उसके एक साथी को सौंप दिया गया था।
वीडियो कॉल से मिला था प्रशिक्षण
आईजी भुल्लर के मुताबिक, आरोपियों ने सोशल मीडिया ऐप और वीडियो कॉल के माध्यम से विस्फोटक लगाने और उसे सक्रिय करने का प्रशिक्षण लिया था। आरोप है कि उन्होंने खासा कैंट की दीवार के बाहर आईईडी रखकर मोबाइल के जरिए विस्फोट किया और मौके से फरार हो गए। एफआईआर संख्या 224 से संबंधित पूछताछ के दौरान पुराने विस्फोट मामले से जुड़े तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई।
ग्लॉक पिस्टल और हैंड ग्रेनेड बरामद
दूसरी कार्रवाई में अमृतसर देहात पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के साथ संयुक्त अभियान चलाकर 9 एमएम ग्लॉक पिस्टल और एआरजीईएस निर्मित हैंड ग्रेनेड बरामद किया। इस मामले में मोगा जिले के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों को सीमा क्षेत्र से हथियार और विस्फोटक सामग्री हासिल करने के निर्देश मिले थे। इसके बाद उन्हें हथियारों के इस्तेमाल के स्थान के संबंध में निर्देश दिए जाने थे।
विदेशी हैंडलरों से संपर्क का संदेह
आईजी ने बताया कि हरमन नाम के एक अन्य संदिग्ध को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। वह मोगा जिले का निवासी है और कथित तौर पर विदेश में बैठे हैंडलरों के संपर्क में था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को इन गतिविधियों के बदले बड़ी रकम देने का लालच दिया गया था। फिलहाल दोनों मामलों में आगे की जांच जारी है।