अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर भड़कीं सुप्रिया सुले, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उठाया मुद्दा
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी को लेकर सांसद सुप्रिया सुले ने पुलिस और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को गलत बताते हुए उनके संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा उठाया। सुले ने चिंता जताई कि कहीं देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति तो नहीं बन रही। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर सुप्रिया सुले ने जताई नाराजगी
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने का मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गिरफ्तारी की आलोचना की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ इस तरह का ही व्यवहार करना उचित नहीं है।
सुले ने पुलिस की कार्रवाई को गलत और असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या देश में ऐसे हालात बन रहे हैं, जिन्हें अघोषित इमरजेंसी जैसी स्थिति कहा जा सकता है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने और स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार मिलना चाहिए।
सुप्रिया सुले ने कहा कि CJP से जुड़े लोग संवैधानिक सिद्धांतों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों की बात सुनने और उनकी मांगों पर चर्चा करने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
सांसद ने पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उनका मानना है कि अपनी मांगों को सामने रखने की कोशिश कर रहे लोगों को पहले सुना जाना चाहिए। सुले ने कहा कि देश पहले भी आपातकाल का दौर देख चुका है, इसलिए मौजूदा घटनाओं को लेकर उनके मन में चिंता है।
सुप्रिया सुले ने अपने बयान में....
सुप्रिया सुले ने अपने बयान में बच्चों और युवाओं के अधिकारों पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को केवल अपनी बात रखने या एक जगह से दूसरी जगह जाने की कोशिश करने के कारण रोका नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि बातचीत करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने जैसी कार्रवाई क्यों की जाती है।
सांसद ने प्रदर्शन में शामिल लोगों को देश के बच्चों का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनके अधिकारों और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति जताने और अपनी मांगें सामने रखने के लिए शांतिपूर्ण रास्ता उपलब्ध होना चाहिए।
सुप्रिया सुले ने इस मामले को ....
सुप्रिया सुले ने इस मामले को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से संविधान के सिद्धांतों को लेकर चिंता पैदा होती है। अपने बयान में उन्होंने कहा, “संविधान की हत्या कर रहे हैं ये लोग।”
सुले ने मीडिया की एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, एक चैनल ने कथित तौर पर ऐसी खबर दिखाई थी, जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शन के दौरान पकड़े जाने वाले बच्चों के पासपोर्ट को लेकर परेशानी हो सकती है।
इस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए सांसद ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। इस तरह अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी और CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा अब पुलिस कार्रवाई, युवाओं के अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और मीडिया की रिपोर्टिंग को लेकर बहस का विषय बन गया है।