नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि अगर 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी दी गई है, तो उनके लिए पर्याप्त ईंधन की व्यवस्था कैसे होगी। अदालत इथेनॉल आवंटन से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने हालिया मीडिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि इसके लिए बड़े स्तर पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे। कोर्ट ने इस मामले में किसानों के हितों और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की बात कही। अगली सुनवाई अगले महीने होगी।
E100 वाहनों को मंजूरी, लेकिन सप्लाई पर सवाल
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति दी गई है, जो E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल से चल सकते हैं।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें E85 भी शामिल है, जिसमें 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है। E100 में लगभग पूरा ईंधन इथेनॉल होता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी संदर्भ में पूछा कि अगर ऐसे वाहनों को अनुमति मिलती है, तो उनके लिए जरूरी ईंधन की आपूर्ति किस तरह सुनिश्चित की जाएगी। सरकार की ओर से कहा गया कि इसके लिए विनिर्माण व्यवस्था में बड़े बदलाव करने होंगे।
पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल मिलाने की तत्काल योजना नहीं
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20% से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है।
यहां दोनों बातों में अंतर समझना जरूरी है। E100 वाहनों को अनुमति देने का मतलब यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण तुरंत 20% से बढ़ाया जा रहा है। E100 वाहनों को लगभग शुद्ध इथेनॉल पर चलने के लिए बनाया जाता है, जबकि सामान्य पेट्रोल वाहनों के लिए अलग ईंधन मानक लागू होते हैं।
मंत्रालय के हालिया संशोधन में उत्सर्जन प्रमाणन से जुड़े नियमों में E85 के साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के हितों पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इथेनॉल से जुड़े फैसलों में किसानों को सशक्त बनाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पीठ ने व्यापक जनहित और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर विचार करने की जरूरत बताई।
न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और किसानों के हित इस मामले का अहम हिस्सा हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि नीति बनाते समय आम लोगों और किसानों के फायदे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह अपनी दलीलों में किसानों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल करेंगे। सुनवाई के दौरान पेश वकीलों ने भी कहा कि इथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को फायदा हो सकता है और केंद्र की नीति में उनके हितों को ध्यान में रखा गया है।
इथेनॉल आवंटन बढ़ाने से जुड़ा है मामला
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इससे पहले 30 जून को अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्देश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, जिसमें इथेनॉल का आवंटन बढ़ाने को कहा गया था।
हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) को एक समर्पित इथेनॉल निर्माता की ओर से आवंटन बढ़ाने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था। एक तेल विपणन कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि हाईकोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि नीति के तहत स्थापित समर्पित इथेनॉल संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटन का लाभ देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। ये संयंत्र दीर्घकालिक खरीद समझौतों के तहत तेल विपणन कंपनियों को इथेनॉल की आपूर्ति करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है। अब इस मामले में ईंधन की उपलब्धता, उत्पादन व्यवस्था, किसानों के हित और राष्ट्रीय इथेनॉल नीति जैसे पहलुओं पर आगे सुनवाई होगी।
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