सुप्रीम कोर्ट ने दी नमाज की इजाजत, राज्य सरकार को व्यवस्था करने के निर्देश

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Update: 2026-07-30 10:44 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच खसरा नंबर 596 की भूमि पर जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। अदालत ने साथ ही राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक और उचित व्यवस्थाएं करने का आदेश भी दिया, ताकि नमाज शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया गया और जुमे की नमाज के लिए विवादित भोजशाला परिसर के निकट वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया। याचिका में कहा गया था कि प्रशासन द्वारा जो स्थान उपलब्ध कराया गया, वह काफी दूर था और अदालत की मंशा के अनुरूप नहीं था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि पहले पारित आदेश को इस सीमा तक संशोधित और स्पष्ट किया जाता है कि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच खसरा नंबर 596 स्थित भूमि पर नमाज अदा कर सकेगा। अदालत ने कहा कि उपलब्ध कराए गए साइट प्लान के अनुसार यह भूमि दरगाह से संबंधित है और वहां तक पहुंचने के लिए अलग एवं स्वतंत्र मार्ग भी मौजूद है। इसलिए यह स्थान उपयुक्त प्रतीत होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुरक्षा, आवागमन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत से कहा कि उन्हें इस याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है और वे अपना पक्ष रखना चाहते हैं। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बिंदु रखने की अनुमति मांगी, लेकिन अदालत ने इस चरण पर उनकी मांग स्वीकार नहीं की और मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।
इस मामले की सुनवाई पहले बुधवार को होनी थी। हालांकि, अदालत की कार्यवाही समय से पहले समाप्त होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने अदालत के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने इसे गुरुवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक स्थान की जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई। इस पर मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने जो स्थान उपलब्ध कराया है, वह लगभग 1.3 किलोमीटर दूर है और जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि केवल वही स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह अदालत के पूर्व आदेशों की भावना के अनुरूप नहीं है।
इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रशासन ने एक अन्य स्थान की भी पहचान की है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने उस स्थान पर भी आपत्ति जताई और कहा कि वह काफी दूर है तथा एक ब्रुअरी परिसर के निकट स्थित है, इसलिए वह उपयुक्त नहीं माना जा सकता। मुस्लिम पक्ष ने अदालत को सुझाव दिया कि भोजशाला परिसर के निकट स्थित दरगाह के सामने खाली पड़ी भूमि नमाज के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक मुस्लिम समुदाय को विवादित भोजशाला परिसर के पास ही शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए अलग खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए। गुरुवार के ताजा आदेश के बाद अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुरूप खसरा नंबर 596 स्थित भूमि पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अंतरिम व्यवस्था के रूप में लागू रहेगा, जबकि भोजशाला विवाद से जुड़े मूल मामले की सुनवाई और अंतिम निर्णय भविष्य में किया जाएगा।
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