मुंबई: केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को देश के मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से अपील की कि वे सिर्फ़ कंटेंट मार्केट के दायरे से आगे बढ़कर खुद को ग्लोबल क्रिएटिव लीडर के तौर पर स्थापित करें। उन्होंने कहा कि भले ही भारतीय कहानी कहने की कला का भविष्य टेक्नोलॉजी से तय हो, लेकिन इसकी मूल भावना मानवीय ही रहनी चाहिए।

मुंबई में FICCI FRAMES के 26वें एडिशन में बोलते हुए, शेखावत ने भारत को दुनिया के लिए क्रिएटिविटी का सबसे बड़ा केंद्र बताया। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया के लिए क्रिएटिविटी का सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ न सिर्फ़ कंटेंट है, बल्कि कहानी कहने की परंपरा, विविधता और संदर्भ भी मौजूद हैं। अब समय आ गया है कि भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था, रोज़गार, वैश्विक पहचान और पर्यटन को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। यही हमारी क्रिएटिव पूंजी है।"

शेखावत ने कहा, "ध्यान सीमित है, लेकिन विकल्प असीमित हैं और भरोसा ही सबसे अहम है।"

"भारत की बढ़त सिर्फ़ दर्शकों की संख्या तक सीमित नहीं है। यह सांस्कृतिक इतिहास, भाषाई विविधता, युवा टैलेंट, तकनीकी क्षमता और हज़ारों साल पुरानी कहानी कहने की परंपरा पर आधारित है - जिसमें भीमबेटका की गुफा पेंटिंग और मौखिक परंपराओं से लेकर साहित्य, मूर्तिकला, पेंटिंग, लोक कला, सिनेमा और अब OTT, गेमिंग और संगीत शामिल हैं।"

मंत्री ने कहा कि भविष्य टेक्नोलॉजी से चलेगा, लेकिन इसकी आत्मा मानवीय होनी चाहिए। उन्होंने इंडस्ट्री से मौलिकता, भरोसे और मानवीय क्रिएटिविटी को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुज़र रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट बनाने के नए तरीके कहानियों के बनने, बांटे जाने और देखे जाने के तरीके को बदल रहे हैं।

शेखावत ने कहा, "मुझे लगता है कि अगले दो-तीन सालों में ऐसा समय आएगा जब पूरी दुनिया कम-AI वाले कंटेंट, बिना-फ़िल्टर वाले कंटेंट या सिर्फ़ इंसानों द्वारा बनाए गए कंटेंट की ओर देखने लगेगी।" खास बदलावों पर ज़ोर देते हुए मंत्री ने कहा, "हमें भारत को सिर्फ़ कंटेंट का उपभोक्ता (consumer) बनाए रखने से आगे बढ़कर, कंटेंट बनाने और क्रिएटिविटी के मामले में इसे दुनिया का लीडर बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा। हमें सिर्फ़ अपने दर्शकों की संख्या से आगे बढ़कर ओरिजिनल भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) बनानी होगी। हमें स्क्रीन पर दिखने वाले भारत को असल भारत की यात्रा के अनुभव से जोड़ना होगा, ताकि कहानियाँ टूरिज़्म को बढ़ावा दें और टूरिज़्म से स्थानीय समृद्धि आए।"

नई टेक्नोलॉजी और मौकों के इस्तेमाल पर बात करते हुए शेखावत ने कहा कि क्रिएटिव इकॉनमी कई सब-सेक्टर में बड़े मौके पैदा कर सकती है; AVGC, XR, गेमिंग, वर्चुअल प्रोडक्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहानी कहने की नई भाषाएँ हैं। उन्होंने कहा, "ये पुरानी सभ्यताओं और शहरों को जीवंत कर सकती हैं, म्यूज़ियम में रखी किसी चीज़ की पूरी कहानी बता सकती हैं और युवा पीढ़ी को संस्कृति और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का नया तरीका दे सकती हैं।"

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