ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने रविवार को अस्पताल में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हंगामा खड़ा कर दिया। देर रात पहाड़ी पर एक ट्रक के अनियंत्रित होने के कारण इस हादसे में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है और 25 से अधिक लोग घायल हैं।
रविवार सुबह पीड़ित परिवारों के सदस्य बड़ी संख्या में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर इकट्ठा हुए। उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश दिखाया। इस दौरान एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव भी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे, लेकिन लोगों के विरोध के कारण उन्हें बिना बात किए कड़ी सुरक्षा में वापस लौटना पड़ा।
लोगों में पुलिस प्रशासन की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर काफी आक्रोश है। वह मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि शीतला माता मंदिर पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहती है। इसके बावजूद बड़े ट्रक को वहां एंट्री दी गई।
मृतक गौरव की मां किरण ने आरोप लगाए हैं कि उनके जिंदा बेटे को पुलिसकर्मी पोस्टमार्टम हाउस भेज रहे थे और उन्हीं की लापरवाही के कारण उनके बेटे की मौत हुई है। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मेरा 14 साल का बेटा शीतला मंदिर गया था और वहां ट्रक के नीचे दब गया। यह घटना रात को 12 बजे हुई थी, लेकिन सुबह 4 बजे तक पुलिस वहां नहीं पहुंची थी।"
उन्होंने कहा, "अस्पताल में भर्ती किए जाने के समय बेटे की सांस चल रही थी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हम लोगों ने रास्ता रोका और बच्चे को एक प्राइवेट अस्पताल में ले जा रहे थे। मेरा बेटा जिंदा था और हम गाड़ी में उसे प्राइवेट अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन हमें पुलिसकर्मी बस स्टैंड के पास से वापस लौटाकर ले आए। इसके कारण मेरे बेटे की मौत हो गई।"
मृतक सुरेंद्र की मां आशा प्रशासन से अपने बेटे को मांग रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के लोगों ने उनके बेटे के बारे में गलत जानकारी दी थी और उससे मिलने भी नहीं दिया गया था। इसके अलावा, मृतक दिव्यांश के पिता अशोक ने इस मामले में प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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