दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी शरजील इमाम की अंतरिम जमानत की शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत पर बाहर आए शरजील इमाम को एक पत्रकार की मौजूदगी में कमरे में दिखाई देने के कारण अदालत की नाराजगी का सामना करना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने इसे जमानत की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए उनकी अंतरिम जमानत रद्द करने की मांग की।
अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए माना कि शरजील इमाम ने अंतरिम जमानत की निर्धारित शर्त का उल्लंघन किया है। हालांकि, अदालत ने उनकी जमानत रद्द नहीं की। इसका प्रमुख कारण यह था कि अंतरिम जमानत की अवधि उसी शाम समाप्त हो रही थी और उन्हें जेल वापस लौटना था। जानकारी के अनुसार, शरजील इमाम को अपने चचेरे भाइयों के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए सात दिनों की अस्थायी राहत दी गई थी। यह नियमित जमानत नहीं थी, बल्कि पारिवारिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सीमित अवधि की अंतरिम जमानत थी।
अंतरिम जमानत देते समय अदालत ने कुछ शर्तें निर्धारित की थीं। इनमें मीडिया से संपर्क नहीं करने की शर्त भी शामिल थी। अदालत की ओर से दी गई राहत का उद्देश्य केवल पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने की अनुमति देना था। विवाद उस समय शुरू हुआ, जब शरजील इमाम के भाई का एक पत्रकार इंटरव्यू ले रहा था। इस दौरान शरजील इमाम भी उसी कमरे में दिखाई दिए। दिल्ली पुलिस ने इस घटना को अदालत की निर्धारित शर्तों का उल्लंघन माना।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत का रुख किया और अंतरिम जमानत रद्द करने की मांग की। पुलिस का कहना था कि अदालत ने विवाह समारोह में शामिल होने की अनुमति दी थी, मीडिया से संपर्क करने की नहीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध परिस्थितियों पर विचार किया और शर्त के उल्लंघन को स्वीकार किया। हालांकि, अदालत ने तत्काल जमानत रद्द करने का आदेश देने के बजाय इस तथ्य को ध्यान में रखा कि शरजील इमाम को उसी शाम जेल लौटना था।
इस प्रकार शरजील इमाम को अंतरिम जमानत रद्द होने से राहत मिली, लेकिन अदालत ने शर्तों का पालन करने की अनिवार्यता को स्पष्ट किया। यह मामला अदालत से मिलने वाली अंतरिम राहत और उससे जुड़ी शर्तों के पालन के महत्व को भी सामने लाता है। अंतरिम जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी को सभी प्रकार की गतिविधियों की स्वतंत्रता मिल गई है। अदालत विशेष परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए राहत देते समय आवश्यक प्रतिबंध निर्धारित कर सकती है।
गौरतलब है कि शरजील इमाम वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज है। इस मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
फिलहाल अदालत ने अंतरिम जमानत रद्द नहीं की है। हालांकि, शर्तों के उल्लंघन को लेकर की गई टिप्पणी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।