अंधविश्वास की शर्मनाक तस्वीर: डायन बताकर दो महिलाओं की बेरहमी से पिटाई, पुलिस जांच में जुटी
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Purnia. पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले से अंधविश्वास की एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जहां दो अलग-अलग घटनाओं में महिलाओं को डायन कहकर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की कोशिश की गई। दोनों घटनाएं पूर्णिया के के.हाट थाना क्षेत्र की हैं और पुलिस ने दोनों मामलों में पीड़िताओं के लिखित आवेदन के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों घटनाएं जनता चौक रेलवे गुमटी इलाके के हनुमानबाग और महराजी हाता में घटीं। इस बर्बरता ने एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास, महिला विरोधी मानसिकता और सामाजिक असंवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।
पहली घटना: मां-बेटी को डायन कहकर पीटा, रेलवे लाइन पर फेंका गया
पीड़िता, जो कि जनता चौक रेलवे गुमटी के पास हनुमानबाग इलाके की रहने वाली हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि 23 जुलाई की शाम वह अपनी बुजुर्ग मां के साथ बाजार से लौट रही थीं, तभी रेलवे गुमटी संख्या 3 के पास रहने वाली तीन महिला और एक युवक ने उन्हें और उनकी मां को देखकर डायन कहकर थूकना शुरू कर दिया। जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए बाल पकड़ कर पीड़िता को रेलवे ट्रैक पर पटक दिया। इसके बाद आरोपियों ने उसे गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की। जब पीड़िता की बुजुर्ग मां ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन्हें भी लात-घूंसों से पीटा गया।
स्थानीय लोगों ने बचाई जान
मां-बेटी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे और हस्तक्षेप कर किसी तरह हमलावरों को वहां से हटाया। इसके बाद पीड़िता अपनी मां को लेकर नजदीकी अस्पताल गईं और इलाज के बाद देर शाम के.हाट थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके परिवार की जान को खतरा बना रहेगा।
दूसरी घटना: विधवा महिला को पांच वर्षों से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना
दूसरी पीड़िता महराजी हाता इलाके की रहने वाली हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति की मृत्यु कुछ साल पहले हो गई थी, लेकिन उसके बाद से ही पड़ोस में रहने वाली तीन महिला समेत छह लोग उन्हें लगातार डायन कहकर प्रताड़ित करते रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिलसिला पिछले पांच वर्षों से लगातार चल रहा है। पहले ताने, अपशब्द और सामाजिक बहिष्कार, और अब शारीरिक हिंसा तक बात पहुंच गई है। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है।
अपशब्द कहे जाते हैं और समाज में नीचा दिखाया जाता है। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि पति के निधन के बाद जब उन्हें सबसे अधिक सामाजिक और मानसिक सहयोग की जरूरत थी, तब लोगों ने उन्हें डायन कहकर हाशिये पर धकेल दिया। अब स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि उन्हें घर से निकलने में डर लगने लगा है। थक-हारकर वह के.हाट थाना पहुंचीं और आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत देकर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अब वह और प्रताड़ना सहन करने की स्थिति में नहीं हैं।
पुलिस का बयान: FIR दर्ज, गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू
के.हाट थानाध्यक्ष उदय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों घटनाओं में अलग-अलग पीड़िताओं द्वारा आवेदन दिया गया है और प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि ये मामले गंभीर प्रकृति के हैं और इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पुलिस दोषियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे मामलों में टालमटोल नहीं की जाएगी, और समाज में अंधविश्वास फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।
अंधविश्वास: समाज के लिए कलंक
पूर्णिया की ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि शिक्षा, तकनीक और विकास के इस दौर में भी समाज का एक बड़ा तबका अंधविश्वास और कूपमंडूकता से ग्रसित है। “डायन प्रथा” के नाम पर आज भी निर्दोष महिलाओं को मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जा रही हैं, उन्हें समाज से बहिष्कृत किया जा रहा है, और सबसे खतरनाक बात उन्हें मार डालने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, डायन बताकर महिलाओं को प्रताड़ित करना सिर्फ अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है। इसके पीछे अक्सर जमीन विवाद, घरेलू झगड़े, जातीय द्वेष और महिलाओं के खिलाफ पितृसत्तात्मक मानसिकता काम करती है।