Delhi दिल्ली। राष्ट्रपति पद का कामकाज संभालने के पहले दिन ही डोनाल्ड ट्रंप ने 100 से ज्यादा सरकारी आदेशों पर साइन किए. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अपने ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई आदेशों पर हस्ताक्षर किए और पत्रकारों को बताया कि वो इस बार वो ज्यादा आत्मविश्वास से भरा महसूस कर रहे हैं.ट्रंप करीब 50 मिनट तक फाइलों पर साइन करते हुए पत्रकारों से बात करते रहे. ट्रंप से दर्जनों सवाल पूछे गए लेकिन बार-बार जिस बात को घुमा फिराकर पूछा गया वो रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी थी.
वहीं, जब उनसे पूछा कि पुतिन से कब मिल रहे हैं? तो उन्होंने (ट्रंप) कहा, हमारी मुलाकात बहुत जल्द हो सकती है. आपको क्या लगता है कि ये जंग कब तक रुकेगी? इसके लिए मुझे पुतिन से बात करनी होगी. जंग से उनकी हालत अच्छी नहीं है. ज्यादातर लोग समझते थे कि रूस-यूक्रेन युद्ध एक हफ्ते में खत्म हो जाएगा, लेकिन इसे 3 साल हो गए हैं, इसलिए उनकी हालत पतली है.
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है पुतिन को ये जंग बंद कर देनी चाहिए. यूक्रेन के साथ लड़ते हुए लाखों रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं. यूक्रेन के भी सैनिक मरे हैं, लेकिन रूस ने ज्यादा सैनिक खोए हैं. देश ऐसे नहीं चलता. मैं समझता हूं कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की रूस के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करना चाहते हैं. पुतिन का मुझे पता नहीं. युद्ध न रोककर पुतिन रूस को तबाह कर रहे हैं. युद्ध की वजह से रूस इस वक्त बहुत मुश्किल में है. मेरी पुतिन से खूब जमती है, मैं उम्मीद करता हूं कि वो जल्द ही समझौता करना चाहेंगे.
यही ट्रंप थे, जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद रूस की जमकर तारीफ करते हुए उसकी सेना को शक्तिशाली बताया था. लेकिन अब ट्रंप के सुर न सिर्फ बदल गए बल्कि वो पुतिन को ये समझाने में लग गए कि क्यों जंग के जल्द से जल्द रोकने में उनकी भलाई है. ट्रंप ने रूस के युद्ध की वजह से रूस और यूक्रेन दोनों देशों को अभूतपूर्व नुकसान वाले बयान पर जोर देते हुए पुतिन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द उन्होंने युद्ध नहीं रोका तो रूस तबाह हो जाएगा. वहीं, यूक्रेन का दावा है कि 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रूस के 8,15,820 सैनिक मारे जा चुके हैं. हालांकि, रूस इससे इनकार करता रहा है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अनुसार, यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस को अपनी सेना तैनात करने, हथियारों और रसद पर 211 अरब डॉलर यानी करीब 18 लाख करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है. इसके अलावा अमेरिका और जी 7 के सदस्य देशों ने रूसी केंद्रीय बैंक के 320 अरब डॉलर यानी करीब 27 लाख करोड़ रुपये ब्लॉक कर दिए थे. क्योंकि रूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.इसके अलावा तेल की कीमतों में गिरावट से रूस को 100 अरब डॉलर यानी करीब 8.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस तरह अगर सभी नुकसान को जोड़ लिया जाए तो कुल 1.3 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 109 लाख करोड़ रुपये का नुकसान रूस को होने का अनुमान है.