Guwahati. गुवाहाटी। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2000 में असम के चाय समुदाय के नेता डैनियल टॉपनो की हत्या के मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिपुन बोरा को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की अपील खारिज कर दी। इससे रिपुन बोरा को बड़ी कानूनी राहत मिली है। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा बोरा को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला सितंबर 2000 में असम के गोहपुर क्षेत्र में डैनियल टॉपनो की हत्या से संबंधित है। 2001 में सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली थी। बाद में सीबीआई ने बोरा को आरोपियों में से एक के रूप में नामित किया था। यह मामला कामरूप जिला एवं सत्र न्यायालय में कई वर्षों तक लंबित रहा, जिसने फरवरी 2014 में बोरा और एक अन्य आरोपी पुलिन फुकन को बरी कर दिया। निचली अदालत ने पाया कि उसके समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त थे।
इसके बाद सीबीआई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी और निचली अदालत के फैसले को पलटने की मांग की। अपील पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को चुनौती खारिज कर दी। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री बोरा कई दशकों से असम की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। सीबीआई ने 2014 में लिए गए बरी होने के फैसले के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन उच्च न्यायालय के नवीनतम आदेश का अर्थ है कि बोरा और फुकन के पक्ष में निचली अदालत का फैसला अभी बरकरार है। असम में इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, क्योंकि टॉपनो चाय बागान समुदाय के नेता के रूप में जाने जाते थे और एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती का नाम इस केस में सामने आया था।
मंगलवार के गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के साथ ही सीबीआई द्वारा रिपुन बोरा को बरी किए जाने के खिलाफ दायर चुनौती खारिज हो गई है। अदालत के विस्तृत आदेश से यह स्पष्ट होगा कि अपील को खारिज करने के पीछे क्या कारण रहे। यह मामला असम के उन कई लंबे समय से लंबित आपराधिक मामलों में शामिल है, जो वर्षों से जांच और न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजरते रहे हैं।
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