11 साल तक निभाई वफादारी, आखिरी विदाई पर फूट-फूटकर रोया पुलिसकर्मी
वीडियो भी सामने आया.
वाशिम: महाराष्ट्र के वाशिम में एक पुलिसकर्मी का वीडियो सामने आया है. वो अपने उस साथी को आखिरी विदाई दे रहा था, जिसके साथ उसने सालों तक काम किया. साथी भी ऐसा, जो बोल नहीं सकता था. लेकिन अपने काम और वफादारी से सबका दिल जीत चुका था. नाम था स्टेफी... वाशिम पुलिस की स्टेफी अब इस दुनिया में नहीं रही. वह बम का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने वाली टीम में शामिल थी. जब स्टेफी को पूरे सम्मान के साथ दफनाया जा रहा था, तो उसके हैंडलर शरद वटाने अपने आंसू नहीं रोक पाए. वो फूट-फूटकर रोने लगे.
महाराष्ट्र के वाशिम पुलिस मुख्यालय में स्टेफी का 11 अक्टूबर को निधन हो गया था. इसके बाद उसे पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मी भावुक हो गए. लेकिन सबसे ज्यादा दुख उसके हैंडलर शरद वटाने को हुआ. शरद ने स्टेफी को ट्रेनिंग दी थी. सालों तक उसके साथ काम किया था. दोनों का रिश्ता सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं था. शरद के लिए स्टेफी परिवार का हिस्सा बन चुकी थी. उन्होंने बताया कि स्टेफी उनके बच्चे जैसी थी.
यह काम जोखिम भरा होता है. इसमें श्वान और उसके हैंडलर के बीच तालमेल, भरोसा और लगातार ट्रेनिंग की जरूरत होती है. स्टेफी ने करीब 11 साल तक पुलिस विभाग के लिए काम किया. इस दौरान उसने अपने काम से विभाग के लोगों के बीच खास जगह बनाई. स्टेफी को शरद वटाने और किशोर डौलसे ने ट्रेनिंग दी थी. साल 2023 में उसे सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया था.
पुलिस डॉग की ड्यूटी को बाहर से देखने पर लग सकता है कि वह सिर्फ अपने हैंडलर के दिशा-निर्देशों का पालन करता है. लेकिन ट्रेनिंग और साथ काम करने के दौरान दोनों के बीच एक खास तालमेल बनता है. हैंडलर अपने श्वान के व्यवहार, उसके रिप्लाई और उसके इशारों को समझना सीखता है. वहीं श्वान भी अपने हैंडलर के निर्देशों के मुताबिक काम करता है. इस रिश्ते में ट्रेनिंग के साथ भरोसे और देखभाल की बड़ी भूमिका होती है.
स्टेफी के मामले में भी शरद वटाने का उससे गहरा लगाव था. उसे ट्रेनिंग देने से लेकर उसके साथ काम करने तक, दोनों ने कई साल साथ बिताए. स्टेफी की मौत उनके लिए सिर्फ एक प्रशिक्षित श्वान को खोना नहीं था. वह उनके जीवन का एक अहम हिस्सा थी. स्टेफी इंसानों की तरह अपने अनुभव नहीं बता सकती थी. वह यह भी नहीं कह सकती थी कि उसने अपने साथियों के साथ बिताए सालों में क्या महसूस किया. लेकिन पुलिस विभाग में उसके काम और उसके प्रति लोगों के लगाव ने दिखा दिया कि सभी को उससे कितना लगाव था.
पुलिस के प्रशिक्षित श्वान क्राइम इनवेस्टिगेशन, विस्फोटकों का पता लगाने और सुरक्षा से जुड़े कामों में भूमिका निभाते हैं. उनकी सेवाओं के पीछे लगातार ट्रेनिंग और उनके हैंडलर की मेहनत होती है. ऐसे में उनकी विदाई केवल एक पशु की मौत नहीं, बल्कि एक लंबे पेशेवर और भावनात्मक साथ का अंत भी होती है. वाशिम में स्टेफी को सम्मान के साथ दफनाया गया. उसके हैंडलर की आंखों से बहते आंसुओं ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया. स्टेफी अब पुलिस विभाग की ड्यूटी पर नहीं लौटेगी. लेकिन 11 साल तक निभाई गई उसकी जिम्मेदारी, साल 2023 में मिला सिल्वर मेडल और उसे अपने बच्चे जैसा मानने वाले शरद वटाने का लगाव उसकी यादों का हिस्सा बने रहेंगे.