नई दिल्ली: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार से जुड़े कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने विजयन और अन्य संबंधित लोगों को केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील करने का मौका दिया है। CPI(M) ने फैसले को कानून के शासन की जीत बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि एफआईआर अब भी कायम है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने वीणा टी. की कंपनी को 2.78 करोड़ रुपये के कथित भुगतान को लेकर आरोप लगाए हैं।
पिनाराई विजयन के परिवार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की रोक
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने मामले की जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद केरल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने विजयन और अन्य संबंधित लोगों को केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील करने की अनुमति दी है। यह अपील उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें 9 अक्टूबर को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, अदालत के आदेश का मतलब यह नहीं है कि एफआईआर रद्द कर दी गई है। जांच पर रोक फिलहाल एक सप्ताह के लिए है, ताकि संबंधित पक्ष हाईकोर्ट में अपनी बात रख सकें और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने स्वागत किया है। पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने बुधवार को कहा कि यह फैसला पार्टी के लिए राहत देने वाला है। गोविंदन के मुताबिक, उनकी पार्टी शुरू से ही इस मामले को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताती रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कानून के शासन को मजबूती मिली है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि CPI(M) इस मामले का सामना कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर करेगी।
गोविंदन ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि विजयन और उनके परिवार की ओर से दायर अपील पर हाईकोर्ट को विचार करना चाहिए था। इसी के बाद उन्हें डिवीजन बेंच में अपील करने का अवसर मिला है।
कांग्रेस बोली- एफआईआर अब भी कायम है
कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत ने एफआईआर रद्द नहीं की है। उनके अनुसार, जांच पर रोक लगाने का उद्देश्य विजयन और अन्य लोगों को हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने तथा अपना पक्ष रखने का अवसर देना है।
चेन्नीथला ने राज्य सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि मामले में जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजे गए पत्र की जांच की गई और कानूनी सलाह लेने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि एफआईआर दर्ज करने का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया था और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राज्य सरकार का रुख सही साबित होता है।
इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके पति पी.ए. मोहम्मद रियास की अपील खारिज कर दी थी। इन लोगों ने 9 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज होने से पहले आरोपी को अपनी बात रखने का कानूनी अधिकार नहीं है। इसके बाद संबंधित पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सुप्रीम कोर्ट से मिली एक सप्ताह की राहत के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में आगे बढ़ सकती है।
ईडी ने लगाए 2.78 करोड़ रुपये के भुगतान के आरोप
सीएमआरएल मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर वीणा टी. की कंपनी ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ को 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। ईडी का दावा है कि यह भुगतान कथित तौर पर फर्जी था। एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस अब बंद हो चुकी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट-1 ने विजयन और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े मामले में दो एफआईआर दर्ज की थीं। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच और तलाशी के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामला दर्ज करने की मांग की थी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच पर एक सप्ताह की रोक लागू है। मामले में एफआईआर रद्द नहीं हुई है और आरोपों पर अंतिम फैसला भी नहीं आया है। अब आगे की कानूनी कार्रवाई और हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।
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