नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शासनाध्यक्षों की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी शांति, सुरक्षा और विकास के रास्ते में बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।
राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, आतंकवाद का असर केवल लोगों की जान जाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे आर्थिक गतिविधियां, व्यापार और समाज का विकास भी प्रभावित होता है।
रक्षा मंत्री के अनुसार...
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सभी देशों को समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
रक्षा मंत्री के अनुसार, आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को मिलकर खत्म करना होगा।
उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल हमलों को रोकना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे काम करने वाले नेटवर्क, वित्तीय सहायता और अन्य सहयोग को भी रोकना जरूरी है।
आतंकवाद से निवेश और व्यापार ...
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के व्यापक प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सबसे गंभीर नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है। हिंसा और अस्थिरता के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती है और समाज में भय का माहौल बनता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद से निवेश और व्यापार की संभावनाएं कमजोर होती हैं। जब किसी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। इसके साथ ही कट्टरता का प्रसार युवाओं को शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों से दूर कर सकता है। राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को केवल किसी एक देश की समस्या के बजाय व्यापक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौती के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया।
सीमा पार आतंकवाद पर भारत का पहले भी सख्त संदेश
इससे पहले 15 अक्टूबर को राजनाथ सिंह ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से भविष्य में कोई आतंकी गतिविधि होती है, तो भारत की प्रतिक्रिया और कड़ी हो सकती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत बातचीत, सह-अस्तित्व और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भारत की शांति और संवाद के प्रति प्रतिबद्धता को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
SCO की बैठक में दिया गया उनका ताजा संदेश भी आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयास और किसी भी तरह के समर्थन को रोकने की जरूरत पर केंद्रित रहा।
बैठक के दौरान ...
बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा और ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से भी मुलाकात की।
ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बारे में सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के लंबे सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने इन ऐतिहासिक रिश्तों को भारत और ताजिकिस्तान के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति के साथ हुई मुलाकात की जानकारी भी साझा की। हालांकि, इस बैठक के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई और क्या निष्कर्ष निकले, इसका विस्तृत ब्योरा फिलहाल सामने नहीं आया है।
शंघाई सहयोग संगठन ....
शंघाई सहयोग संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। आतंकवाद का मुद्दा इस संगठन के लिए लंबे समय से अहम रहा है।
राजनाथ सिंह के संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयास, वित्तीय मदद पर रोक और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध कार्रवाई जैसे विषय प्रमुख रहे। उनका संदेश था कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास के लिए सदस्य देशों को आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ मिलकर काम करना होगा।
Tags: