ढाका में भारत के खिलाफ प्रदर्शन, ट्रांजिट कॉरिडोर और गंगा जल समझौते पर क्यों बढ़ा विवाद?
नई दिल्ली: बांग्लादेश में भारत के साथ संपर्क और व्यापार बढ़ाने की संभावित योजनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर आरोप लगाया है कि वह भारत को अपने देश से ट्रांजिट कॉरिडोर देने की तैयारी कर रही है। शुक्रवार को ढाका में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत के हितों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
नाहिद इस्लाम ने केवल ट्रांजिट कॉरिडोर ही नहीं, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल समझौते को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि पानी के बंटवारे से जुड़े किसी नए समझौते में बांग्लादेश के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।
क्या होता है ट्रांजिट कॉरिडोर और भारत को इससे क्या फायदा होगा?
ट्रांजिट कॉरिडोर ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें एक देश दूसरे देश की सड़कों, रेलमार्गों या दूसरे परिवहन साधनों का इस्तेमाल करके अपने सामान को किसी अन्य क्षेत्र तक पहुंचाता है। इससे लंबा रास्ता तय करने की जरूरत कम हो सकती है और व्यापार में लगने वाला समय भी बचता है।
भारत के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर पूर्वोत्तर राज्यों के लिहाज से उपयोगी हो सकती है। बांग्लादेश के रास्ते संपर्क मिलने पर इन राज्यों तक सामान पहुंचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध होंगे। इससे परिवहन खर्च कम करने और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों तक व्यापार बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, नाहिद इस्लाम इसी संभावना को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार को किसी दूसरे देश को बांग्लादेश के भूभाग के इस्तेमाल की अनुमति देने से पहले राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना चाहिए।
ढाका की सड़कों पर क्यों उतरे प्रदर्शनकारी?
30 अक्टूबर को ढाका में नेशनल सिटिजन पार्टी के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और दूसरे प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया। रैली के दौरान महंगाई, बिजली की समस्या और पेट्रोल-डीजल तथा गैस की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की। इस दौरान भारत के खिलाफ नारेबाजी हुई। रैली में 'दिल्ली नहीं, ढाका-ढाका' जैसे नारे सुनाई दिए। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों और भारत के साथ उसके संबंधों पर सवाल खड़े किए।
जापान के साथ समझौते से कैसे जुड़ा भारत का मामला?
इस विवाद की एक वजह प्रधानमंत्री तारिक रहमान का जापान दौरा भी है। वे 26 से 29 अक्टूबर तक जापान में थे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बंगाल की खाड़ी के आसपास व्यापार और संपर्क सुविधाएं बढ़ाने पर बातचीत हुई।
जापान बांग्लादेश में मातरबाड़ी बंदरगाह परियोजना पर काम कर रहा है। इस बंदरगाह के तैयार होने से समुद्री व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित संपर्क योजनाओं के तहत इसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। इसके लिए बांग्लादेश के रास्ते सड़क और अन्य परिवहन सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि जापान यात्रा के दौरान भारत को ट्रांजिट सुविधा देने पर कोई बातचीत नहीं हुई। उनके मुताबिक, चर्चा केवल बांग्लादेश और जापान के आपसी आर्थिक संबंधों तक सीमित थी।
भारत ने जापान के साथ पूर्वोत्तर को लेकर क्या कहा?
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की जापान यात्रा के दौरान ही भारत ने भी जापान के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही थी। 28 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और जापान के बीच पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी कई योजनाएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी है और भारत इसे आगे बढ़ाना चाहता है। इस बयान के बाद बांग्लादेश में प्रस्तावित संपर्क मार्गों को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।
गंगा जल समझौते की समय सीमा भी करीब
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का समझौता 12 दिसंबर 1996 को हुआ था। यह 30 साल के लिए लागू किया गया था और इसकी अवधि दिसंबर 2026 में पूरी होने वाली है।
इस समझौते के तहत जनवरी से मई के बीच फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का बंटवारा किया जाता है। यह नदी में पानी कम रहने का समय होता है। बांग्लादेश चाहता है कि नए समझौते में उसे लंबे समय तक पानी मिलने की व्यवस्था हो और सूखे के मौसम में भी उसके हिस्से का पानी सुनिश्चित किया जाए।
भारत और बांग्लादेश के बीच इस मुद्दे पर तकनीकी स्तर पर बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच नदियों से जुड़े मामलों को देखने के लिए 1972 में संयुक्त नदी आयोग बनाया गया था। अब ट्रांजिट कॉरिडोर और गंगा जल समझौते जैसे मुद्दे बांग्लादेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गए हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और सरकार के फैसलों से तय होगा कि इन मामलों पर आगे क्या रास्ता निकलता है।