प्रधानमंत्री मोदी ने निकोलाई पात्रुशेव से की महत्वपूर्ण वार्ता
ब्लू इकोनॉमी
Delhi दिल्ली: भारत और रूस के बीच समुद्री सहयोग को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति के सलाहकार और मैरीटाइम बोर्ड के चेयरमैन निकोलाई पात्रुशेव का मंगलवार को स्वागत किया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच समुद्री क्षेत्र में विभिन्न आयामों पर बेहद उत्पादक और सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक के दौरान समुद्री सहयोग, कनेक्टिविटी, कौशल विकास, शिपबिल्डिंग और ब्लू इकोनॉमी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नए अवसरों पर विस्तार से वार्ता हुई। भारत ने रूस के साथ समुद्री सुरक्षा, कॉमर्शियल शिपिंग, बंदरगाह अवसंरचना विकास और आर्कटिक रूट्स में सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत समुद्री क्षेत्र में सतत विकास और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बढ़ती चुनौतियों, समुद्री सुरक्षा खतरों और जलमार्गों के प्रभावी उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया। कौशल विकास के क्षेत्र में भारत ने रूस के साथ मिलकर नई प्रशिक्षण पहलों और समुद्री उद्योग में रोजगार अवसरों को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। शिपबिल्डिंग सेक्टर में तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और आधुनिक जहाज निर्माण तकनीक साझा करने पर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी। .
ब्लू इकोनॉमी पर चर्चा करते हुए दोनों देशों ने समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, समुद्री जैव विविधता संरक्षण और महासागर-आधारित उद्योगों के विकास को प्राथमिक फोकस बताया। भारत ने कहा कि यह क्षेत्र भविष्य की आर्थिक वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए अहम भूमिका निभाएगा। कनेक्टिविटी के मुद्दे पर भारत और रूस ने नए समुद्री मार्गों, ट्रांस-एशियन लॉजिस्टिक्स, और उत्तरी समुद्री मार्ग (NSR) के संभावित उपयोग पर विचार साझा किए। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देश एक-दूसरे की क्षमता और संसाधनों का उपयोग कर वैश्विक समुद्री व्यापार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वार्ता के अंत में दोनों पक्षों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और विस्तृत करने और भविष्य की पहलों को गति देने पर सहमति व्यक्त की।